भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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८६ सौंदर्य लहरी

अपने ईश्वर का निरादर कैसे सहन कर सकती है। प्रजापति से यहां हमारा अभिप्राय राजे महाराजाओं से नहीं है, हमारे विचार से तो प्रत्येक गृहस्थ जो बच्चे पैदा करने में ही कुशल है अपनी प्रजा का छोटा-मोटा प्रजापति ही है। अस्तु। दक्ष प्रजापति के यज्ञ में सती के देह त्याग के पश्चात शंकर दीर्घकालीन समाधि लगाकर बैठ गये, और सती ने पर्वतराज हिमालय के घर जन्म ग्रहण किया। पार्वती ने शिवजी के साथ विवाह करने का हठ किया और उग्रतप करने लगी। तब देवाताओं ने काम देव को शिवजी की समाधि खोलने के लिये भेजा। कामदेव उपरोक्त सेना लेकर सशस्त्र शिवजी के स्थान पर पहुंचा, वहां वसंत ऋतु का प्रादुर्भाव हुआ, मलयागिरि की शीतल मंद सुगंधित वायु चलने लगी, पुष्प खिल गये जिन पर भौंरे गूंजने लगे और काम देव ने अपने पांचों बाणो का शिवजी पर प्रहार किया, बस शिवजी की समाधि खुल गई। उन्होंने सामने कामदेव को एक झाड के पीछे खड़ा देखा। उसको अपनी समाधि में विघ्नरूप देखकर शिवजी ने तीसरा ज्ञान नेत्र खोला और ज्ञानाग्नि से उसे भस्म कर दिया, तब से काम अनंग हो गया है। उसकी पत्नि रति ने पार्वती से अपना शोक सुनाया, भवानी ने कृपा कर के उसे फिर जीवित कर दिया। अब वह अनंग होने पर भी कामियों को अपने प्रभाव से पराजित कर के सारे जगत का विजेता कहलाता है। प्रभव के लिये मैथुनिक सृष्टि की आवश्यकता है, और काम के बिना सृष्टि प्रभव संभव नहीं। भगवान ने भी कहा है।

धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ।