सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें९२ सौंदर्य लहरी
भगवती के नीचे के वाम हस्त में पाश, और ऊपर के वाम हाथ में धनुष, दक्षिण हाथों में नीचे अंकुश और ऊपर ५ बाण हैं।
अगले श्लोक में भगवती के ध्यान के लिये पीठ का वर्णन किया गया है।
[ ८ ]
सुधासिन्धोर्मध्ये सुरविटपिवाटीपरिवृते
मणिद्वीपे नीपोपवनवति चिन्तामणिगृहे।
शिवाऽऽकारे मंचे परमशिवपर्यङ्कनिलयां
भजन्ति त्वां धन्याः कतिचन चिदानन्दलहरीम् ॥
**कठिन शब्दोंका अर्थ:—**शिवाकारे=त्रिकोणाकृति, निलय=आलय
अर्थ:— सुधा के समुद्र के मध्य, कल्प वृक्षों की वाटिका से घिरे हुए मणि द्वीप में, नीप वृक्षों के उपवन के बीच चिन्ता-मणियाँ के बने घर में, त्रिकोणाकृति मंच पर, परम शिव के पलंग पर विराजमान चिदानन्द लहरी स्वरूप तेरा, कोई बिरले मनुष्य भजन करते हैं, वे धन्य हैं।
सं० टि० शिवाकारे=शिव+आकारे अथवा शिवा+आकारे । यहां हृदय में आनन्दावेष की अनुभूति की ओर लक्ष्य कराया गया है। ॐ कार में अ+उ+म्+नाद+बिन्दु+शान्ति ( कला )+शान्त्यातीता सात मात्रा मानी जाती हैं। अ ब्रह्मा, उ विष्णु, म् रुद्र, नाद ईश्वर,