भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

पृष्ठ 132, कुल 415 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 132

९२ सौंदर्य लहरी

भगवती के नीचे के वाम हस्त में पाश, और ऊपर के वाम हाथ में धनुष, दक्षिण हाथों में नीचे अंकुश और ऊपर ५ बाण हैं।

अगले श्लोक में भगवती के ध्यान के लिये पीठ का वर्णन किया गया है।

[ ८ ]

सुधासिन्धोर्मध्ये सुरविटपिवाटीपरिवृते
मणिद्वीपे नीपोपवनवति चिन्तामणिगृहे।
शिवाऽऽकारे मंचे परमशिवपर्यङ्कनिलयां
भजन्ति त्वां धन्याः कतिचन चिदानन्दलहरीम् ॥

**कठिन शब्दोंका अर्थ:—**शिवाकारे=त्रिकोणाकृति, निलय=आलय

अर्थ:— सुधा के समुद्र के मध्य, कल्प वृक्षों की वाटिका से घिरे हुए मणि द्वीप में, नीप वृक्षों के उपवन के बीच चिन्ता-मणियाँ के बने घर में, त्रिकोणाकृति मंच पर, परम शिव के पलंग पर विराजमान चिदानन्द लहरी स्वरूप तेरा, कोई बिरले मनुष्य भजन करते हैं, वे धन्य हैं।

सं० टि० शिवाकारे=शिव+आकारे अथवा शिवा+आकारे । यहां हृदय में आनन्दावेष की अनुभूति की ओर लक्ष्य कराया गया है। ॐ कार में अ+उ+म्+नाद+बिन्दु+शान्ति ( कला )+शान्त्यातीता सात मात्रा मानी जाती हैं। अ ब्रह्मा, उ विष्णु, म् रुद्र, नाद ईश्वर,

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित) · पृष्ठ 132, कुल 415 में से · BharatKosha