भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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सौंदर्य लहरी १०९


का १/८ भाग मिटाना है। गै रेखा के सिरों पर से ५/८८ वां और र्द रेखा के सिरों से ७/३२ भाग, जैं और र्ड रेखाओं के सिरों पर से ३/८ भाग और टें रेखा के सिरों पर से ३/८ भाग मिटा दो, चै और तैं रेखाएं पूरी रहेंगी। खडी रेखा पर कं बिन्दु के ६ विभाग ऊपर वाले अन्तर्वृत्तस्थ बिन्दु को स मानों और पें बिन्दु से ६ विभाग नीचे वाले अन्तर्वृत्तस्थ बिन्दु को ह मानो। ह को चै वाली रेखा के सिरों को मिलाने से चौथा श्रीकंठ (शिव-त्रिकोण) बनता है, पें बिन्दु को गै रेखा के मिटाने के पश्चात् नये सिरों को मिलाने से तीसरा, र्द बिन्दु को जैं रेखा के मिटाने के पश्चात् नये सिरों को मिलाने से दूसरा, और तैं बिन्दु को कें रेखा के नये सिरों को मिलाने से प्रथम श्रीकंठ बनता है। इसी प्रकार जैं बिन्दु को पें रेखा के नये सिरों को मिलाने से प्रथम शक्ति त्रिकोण, चै बिन्दु को टें रेखा के सिरों को मिलाने से दूसरा, गै बिन्दु को र्ड रेखा से मिलाने से तीसरा, कें बिन्दु को र्द रेखा से मिलाने से चौथा और स बिन्दु को तैं रेखा से मिलाने से पांचवां शक्ति त्रिकोण बनता है।

उक्त ९ त्रिकोणों को बनाने का क्रम इस प्रकार होना चाहिये, जिससे मध्य त्रिकोण, अष्टार, अन्तर्दशार, बहिर्दशार, और चतुर्दशार चक्रों का निर्माण क्रमशः सामने आता जाय।

पहिले प्रथम शक्ति त्रिकोण बनाओ, फिर दूसरा शक्ति त्रिकोण बनाने से मध्य त्रिकोण स्पष्ट दिखने लगता है। वैसे तो वह प्रथम शक्ति त्रिकोण के बनने से ही टें रेखा के ऊपर दिखने लगता है दूसरे शक्ति त्रिकोण की उसे अपेक्षा नहीं है। फिर प्रथम शिव