सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसौंदर्य लहरी ११७
का योग हो जाता है। सब किरणों को सुषुम्ना पथ में, कार्य को कारण में लीन करते हुए, भगवती के चरणों तक पहुंचा जाता है, अर्थात् आज्ञा चक्र के ऊपर जाया जाता है। जैसा कि श्लोक में कहा है कि भगवती के दोनों चरण सब किरणों का अतिक्रमण कर के सब के ऊपर स्थित हैं।
किरणों का संबंध तत्वों से, वर्ण माला से और उनके अधिष्ठातृ शक्तियों से त्रिविध जानना चाहिये।
किरणों का तत्वों से सम्बन्ध
पृथिवी की ५६ किरणें:— ५ महाभूत, ५ तन्मात्रा, ५ कर्मेन्द्रियां ५ ज्ञानेन्द्रियां, ४ अन्तःकरण चतुष्टय, कला, प्रकृति, महत्, और पुरुष। इनका योग २८ है और शिव शक्ति भेद से ५६।
जल किरणें:— ५ महाभूत, १० इन्द्रियां, १० उनके कार्य और मन। इनका योग २६ है और शिव शक्ति भेद से ५२।
अग्नि की किरणें:— ५ महाभूत, ५ तन्मात्रायें, १० इन्द्रियां, १० उनके कार्य और मन, सब का योग ३१ है, शिव शक्ति भेद से ६२।
वायु की किरणें: — ५ महाभूत, ५ तन्मात्रा, ५ कर्मेन्द्रियां, ५ ज्ञानेन्द्रियां, ४ अन्तःकरण चतुष्टय, कला, प्रकृति और पुरुष। इनका योग २७ है, शिव शक्ति भेद से ५४।
आकाश की किरणें:—सब ३६ तत्व, शिव शक्ति भेद से ७२