सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१५८ | सौंदर्य लहरी
अर्थात् सदाशिव इस सबको लील जाते है अथवा तेरे क्षणचपल भ्रूलताओं की आज्ञा का आलंब लेकर सब पर अनुग्रह करते रहते हैं ।
सं० टि०:— अनुगृह्णाति का अर्थ 'अपने में लीन कर लेता है' भी किया जा सकता है । तब श्लोक का अर्थ इस प्रकार होगा । तेरी आज्ञा को पाकर भ्रूलताओं के इशारे मात्र से ब्रह्मा सृष्टि करता है, हरि पालन करता है, रुद्र संहार करता है, ईश्वर तीनों का तिरस्कार पूर्वक तटस्थ रहता है और सदाशिव सबको अपने में ( प्रलय के समय ) लीन कर लेता है ।
ब्रह्मा जिस सृष्टि की रचना करते हैं और विष्णु पालन करते हैं, उसका प्रलय के समय रुद्र संहार कर देते हैं । अर्थात् ब्रह्मा और विष्णु के साथ रुद्र भी लयाभिमुख होकर महेश्वर तत्व में लीन हो जाते हैं, और महेश्वर भी मानो तिरस्कार पूर्वक अपने नेत्र बंद कर लेते हैं अर्थात् वे भी बीज रूप सदाशिव में लीन हो जाते हैं । परंतु विश्व का प्रलय हो जाने पर भी प्रभव की बीज शक्ति सदाशिव में बनी रहती है, जिसके कारण प्रलय काल के समाप्त होने पर सदाशिव फिर नई सृष्टि का प्रभव करते हैं, मानों वे भगवती की आज्ञा के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र और महेश्वर सब पर अनुग्रह करके फिर पूर्व कल्प के अनुसार सबको नया जीवन प्रदान करते हैं । अर्थात् भगवती सबकी अधिष्ठात्री है क्योंकि प्रभव और प्रलय दोनों शक्ति के ही कार्य हैं । और ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र और महेश्वर तो भगवती के कर्मचारी मात्र हैं, इसलिये अगले श्लोक में कहा गया है कि