सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 225, कुल 415 में से
संदर्भ में पढ़ेंसौंदर्य लहरी १७५
सिद्ध योगेश्वरी मत (३) कुरुपिका मत, (४) देवरूपिका मत, (५) सर्ववीर मत, (६) विमला मत, (७) ज्ञानार्णव और (८) वीरावलि ।
हादि और कादि विद्याओं के रूप
[ ३२ ]
शिवः शक्तिः कामः क्षितिरथ रविः शीतकिरणः
स्मरो हंसः शक्रस्तदनु च परामारहरयः ।
अमी हृल्लेखाभिस्तिसृभिरवसानेषु घटिता
भजन्ते वर्णास्ते तव जननि नामावयवताम् ॥
[ ३३ ]
स्मरं योनिं लक्ष्मीं त्रितयमिदमादौ तव मनो-
र्निधायैके नित्ये निरवधिमहाभोगरसिकाः ।
(जपंति) भजंति त्वां चिन्तामणिगुणनिबद्धाक्षव(र)लयाः
शिवाऽग्नौ जुह्वन्तः सुरभिघृतधाराऽऽहुतिशतैः ॥
अर्थ— हे जननि ! शिव, शक्ति, काम, क्षिति और फिर रवि, शीतकिरण (चन्द्र), स्मर (काम), हंस, शक्र, इसके पीछे परा (शक्ति), मार (काम), हरि, इन तीनों के अन्त में ३ हृल्लेखा जोडकर तेरे नाम के अवयव स्वरूप अक्षरों का साधक जन भजन करते हैं । (३२)