सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें| २१६ | सौंदर्य लहरी |
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और हृदय में सूर्य अग्नि। वास्तव में ५ अग्नि जानना चाहिये। इस विषय पर योग शिखोपनिषत् में पांच ही अग्नियों का ध्यान बताया गया है। वह इस प्रकार है:—
स्थूलं सूक्ष्मं परंचेति त्रिविधं ब्रह्मणो वपुः।
स्थूलं शुक्रात्मकं विन्दुः सूक्ष्मं पंचाग्निरूपकम्॥ (५,२८)
सोमात्मकः परः प्रोक्तः सदासाक्षी सदाच्युतः॥
अर्थ:— ब्रह्म का शरीर त्रिविध है — स्थूल, सूक्ष्म और पर। शुक्र (वीर्य) स्थूल रूप है, पञ्चाग्नि सूक्ष्म रूप है और सोम पर रूप है, जो अच्युत सदा साक्षी है। स्थूल विन्दु से पंचाग्नि का संबंध प्रथम ग्रंथि है, पंचाग्नि से पर विन्दु का संबंध दूसरी ग्रंथि है और पर विन्दु से आत्मा का संबंध तीसरी ग्रंथि है। आगे पंचाग्नियों का वर्णन करते हैं:—
पातालानामधो भागे कालाग्नियः प्रतिष्ठितः ॥ (५,२९)
मूलाग्निः शरीरेऽग्निर्यस्मान्नादः प्रजायते।
वडवाग्नि शर्गरस्थो स्वाधिष्ठाने प्रवर्तते ॥ (५,३०)
काष्ठपाषाणयोर्वन्हिर्हास्थिमध्ये प्रवर्तते।
काष्ठपाषाणजो वन्हिः पार्थिवो ग्रहणंगतः ॥ (५,३१)
अन्तरिक्षगतो वन्हिर्वैद्युतः स्वान्तरात्मकः।
नभःस्थः सूर्य रूपोऽग्नि र्नाभिमण्डलमाश्रितः ॥ (५,३२)
विषं वर्षति सूर्योऽसौ स्रवत्यमृतमुन्मुखः।
तालु मूले स्थितश्चन्द्रः सुधां वर्षत्यधोमुखः (५,३३)