सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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जड भौतिक-वादी जन तो सब शक्ति की ही उपासना करते हैं, परंतु उनकी उपासना अचेतनता के स्तर पर है, उसमें देव भाव न होने के कारण वह प्राणहीन उपासना है । सनातन धर्मावलंबी भक्तगण चिति शक्ति के उपासक होते हैं और उनकी वह उपासना परम ब्रह्मतत्त्व की ही उपासना है । वैष्णवों के वृन्दावन की श्री राधा रानी, राम के मन्दिरों में सीता माता, शैवों की उपासना में उमा और शाक्तों की मां दुर्गा, काली, शक्ति उपासना की प्रथम प्रधानता के द्योतक हैं । शंकर भगवत्पाद ने सौंदर्य लहरी में जगज्जननी उमा पार्वती की प्रार्थना के मिस सनातन धर्म के अतिरहस्यमय गूढ और प्रभाव शाली शक्ति उपासना के एक उस साधन क्रम की विशद व्याख्या की है, जो श्रीविद्या के नाम से प्रसिद्ध है । श्रीविद्या की उपासना पद्धति तंत्रों की आधारभूत पद्धति है, जो योगियों में श्री रूपा कुण्डलिनी शक्ति को जगाने के लिये गुरु परंपरा से गुरु की शक्तिपात दीक्षा द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है । यह उपासना वैदिक काल से चली आ रही है, इस बात का अकाट्य प्रमाण यह है कि तैत्तिरीय अरण्यक की एक आख्यायिका में देखने को मिलता है कि पृश्नी नाम के ऋषियों ने श्रीचक्र के अर्चन द्वारा कुण्डलिनी शक्ति का मूलाधार से सहस्रार में उत्थान करके योग सिद्धि प्राप्त की थी, और भास्करराय भी कादि विद्या की प्रधानता सिद्ध करने के प्रमाण में ‘चत्वार ईं बिभर्ति क्षेमयन्तः’ इस शाङ्खायन श्रुति को उद्धृत करके अपने वरिवस्या रहस्य नामक ग्रंथ में कहते हैं कि इस ऋचा में चार ‘ईं’ से कादि पंचदशी मंत्र की ओर संकेत है । त्रिपुरा तापनी उपनिषद् में कादि पंचदशी का उद्धार गायत्री मंत्र, ‘जातवेदसे सुनवाम’ और