सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसौंदर्य लहरी २३५
डमरू वाद्य है, जिसको उनके चिदाकाशरूपी देह की स्पन्द-ध्वनि का वाचिक-व्यंजक अभिनय कह सकते हैं।
शिव तांडव का साक्षात् प्रत्यक्षी-करण तारों की टिमटिमाहट-रूपी डिमडिम में, ग्रहों के नृत्य में, सूर्य के नेत्रोल्हास में, पृथ्वी के षड्ऋतुओं के श्रृंगारयुक्त नाट्य में, चन्द्रमा की कलाओं में, विद्युत् की क्रीडा में, वसंत की मंद सुगंधित वायु के झकोरों में, पुष्पों के हास्य में, समुद्र की तरंगों में, हिमपात के हिमकणों के नर्तन में, आंधी तूफानों की द्रुत गति में, नदियों के कल-कल निनाद में, पर्वतों के श्रृंगार में, शस्य-श्यामा भूतल के आंचल के हिलोरों में, पशुपक्षियों की अटरखेलियों में और मनुष्य की मस्तीभरी चालों में, कहां नहीं ? सर्वत्र किया जा सकता है !
यह सब विराट्विश्व सृष्टि-प्रसार का निम्नतम स्तर रूपी मूलाधार है, जिसमें भगवती के इस लास्य नृत्य और शंकर के तांडव को युगपद् देखने वाले उपासक जीवन मुक्ति का आनंद लेते हैं। जो मूढ अपने तुच्छ स्वार्थों के अंधकार वश इसका साक्षात्कार नहीं कर पाते और मिथ्या अज्ञान वश शोक-मोह के कूपों में पड़े रोते हैं वे वास्तव में दया के पात्र हैं।