भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 415 में से

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अर्वाचीन सब विद्वानों का एक मत होने से, यह विषय अधिक विवादास्पद नहीं है; श्रीमच्छङ्कर भगवत्पाद के लिखित अनेक देवी देवताओं के स्तोत्र प्रसिद्ध हैं, परन्तु विद्वत्समाज का जितना ध्यान सौन्दर्य लहरी ने आकर्षित किया है और अब भी वह जितने मान से देखी जाती है, उतना दूसरा स्तोत्र नहीं है। सौन्दर्य लहरी पर श्री अच्युतानन्द, पंडित अनन्त कृष्ण शास्त्री और लक्ष्मीधर जैसे विद्वानों की टीकाएं संस्कृत साहित्य में बडे आदर से देखी जाती हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट के प्रमुख न्यायाधीश सर जोन् वुड्रफ महोदय ने भी, जो तांत्रिक संसार में आर्थर अवैलन के नाम से प्रसिद्ध हैं और तांत्रिक साहित्य का अन्वेषण, अध्ययन और प्रकाशन करके पाश्चात्य जगत् का ध्यान इस ओर खेंचने का श्रेय जिनको प्राप्त है, सौंदर्य लहरी के पूर्व भाग आनन्द लहरी पर एक संक्षिप्त अंग्रेजी टीका लिखी है। उक्त टीका के प्राक् कथन (preface) में जो मत प्रकट किया गया है, वह हम पाठकों की जानकारी के लिये यहां नीचे देते हैं। तदनुसार बंगाल के प्रसन्नकुमार शास्त्री की ई. सन १९०८ में प्रकाशित श्री शङ्कराचार्य ग्रंथावलि में सौन्दर्य लहरी को भी स्थान दिया गया है। और वहां पाठकों का लक्ष्य महामहोपाध्याय सतीशचन्द्र विद्याभूषण के कलकत्ता रिव्यू के १९१५ जूलाई मास के अंक में प्रकाशित एक लेख की ओर भी कराया गया है। आप का कहना है कि सौन्दर्य लहरी की प्राचीनता तो इस बात से काफ़ी निश्चय के साथ प्रमाणित है कि इस पर स्तोत्र साहित्य में सब से अधिक टीकायें मिलती हैं, यद्यपि यह बात उसके भगवत्पाद का लेख होने का तो प्रमाण नहीं कही जा सकती; परन्तु सारे भारतवर्ष में