भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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सौंदर्य लहरी २४१


मुकुट का ध्यान

[ ४२ ]

गतैर्माणिक्यत्वं गगनमणिभिः सान्द्रघटितं
किरीटं ते हैमं हिमगिरिसुते कीर्तयति यः ।
स नीडेयच्छायाच्छुरणशबलं चन्द्रशकलं
धनुः शौनासीरं किमिति न निबध्नाति धिषणाम् ॥

कठिन शब्दों के अर्थ:— सान्द्रं घटितं=घनी भूत पास २ जडे हुए. नीडे=घोंसले में. छायाच्छुरण=मणियौं की द्युति की चमक. शकल=टुकडा. शौनासीरं=इन्द्रं का. धिषणा=समझ, धारणा.

अर्थ:— हे हिमाचल की पुत्रि ! जो मनुष्य तेरे सुवर्ण के बने हुए किरीट का वर्णन करे तो उसकी धारणा ऐसी क्यों न होगी, कि मानो इन्द्र धनुष निकला हुआ है । क्योंकि वह किरीट गगन मणियों अर्थात तारागण रूपी मणियों से घनीभूत जडा हुआ है और चन्द्रमा के टुकडे का पक्षि के घोंसले सदृश जान पडता है और जो उषः कालीन प्रकाश में रंगबरंगा चमक रहा है ।

अर्थात् उषः कालीन आकाश प्रकृति देवी का किरीट है । यहां कृष्णा चतुर्दशी और अमावस्या की संधि में पडने वाले उषः काल का चित्र खेचा गया है । कृष्णा चतुर्दशी भगवती की उपासना के लिये उपयुक्त तिथि समझी जाती है अर्थात वह भगवती का ही