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सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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२४० | सौंदर्य लहरी

खेंचा है। १ श्लोक में किरीट, ३ श्लोकों में केश, एक में ललाट एक में भ्रू, ९ श्लोकों में नेत्र, २ में दृष्टि, १ में कपोल, १ में कर्ण एक में नासिका, १ में दान्त, १ में मुस्कराहट, १ में मुख का तांबूल, १ में बाणि, १ में चिबुक, २ में ग्रीवा और कंठ, १ में चार हाथ, १ में नखों की द्युति, ४ श्लोकों में स्तन पान द्वारा वात्सल्य स्नेह, ३ श्लोकों में नाभि, २ में कटि, १ में नितम्ब, १ में जानु, १ में पैर, ८ श्लोकों में चरण, १ में शरीर की आभा, शेष श्लोकों में प्रार्थना युक्त सामान्य रूप से सर्वांग सौन्दर्य का चित्र खेंचा गया है। अनुमान होता है, कि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की प्रातःकालीन उषा के रूप में विराट देवी का ध्यान कराया गया है।

पंडित स. सुब्रह्मण्य शास्त्री, और टी. आर. श्रीनिवास अयंगार के अंग्रेजी में लिखित सौन्दर्य लहरी के प्रत्येक श्लोक के साथ एक-एक यंत्र दिया गया है। जिसके पूजन और उससे संबंधित श्लोक के जप सहित अनुष्ठान करने से अनेक कामनाओं की सिद्धी होती है,

हमने सकाम अनुष्ठानों की ओर ध्यान न देकर केवल एक निष्काम उपासक अथवा एक योगी की दृष्टि से यह ग्रन्थ लिखा है, क्योंकि जिस भगवती के स्तोत्र के एक २ श्लोक के अनुष्ठान द्वारा जन्म मरण की शृंखलाबद्ध कारणभूत कामनाओं की पूर्ति होती है उस स्तोत्र के सामूहिक अनुष्ठान का फल अनन्त आप्तकाम पद का देने वाला क्यों न होगा ?