सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसौंदर्य लहरी २३९
है, परन्तु एक में चेतन रूप में और दूसरे में जड के रूप में । पूर्व भाग में चिति शक्ति का कीर्ति गान कर के साधक-गणों के ध्यानार्थ ब्रह्मांड रूपी विराट् देह में निवास करने वाली उस अधि-देवी के सौन्दर्य का निरूपण सौन्दर्य लहरी संज्ञक उत्तर विभाग के ६२ श्लोकों में किया गया है, ४४ वें श्लोक में जैसा भगवत्पाद स्वयं कहते हैं:—
तनोतु क्षेमं नस्तव वदनसौन्दर्य लहरी ।
सौन्दर्य लहरी के उत्तरार्ध में विश्व को भगवती का विराट् देह मानकर, प्रकृति देवी के दिव्य देह का चित्र खींचा गया है जो छन्द-शास्त्रोक्त आभूषणों से अलंकृत, सर्व भाव पूर्ण, नवरसों में पगी अनादि अनन्त महामाया महादेवी आदि शक्ति की झांकी दिखाने वाली, वास्तव में सौन्दर्य लहरी ही है, जिसको पढकर अनात्मवादी भी पुराण कवि भगवान शंकर के अवतार भगवत्पाद की इस वैखरी झरी के रसों का आस्वादन कर के, अपनी अनात्म देह में स्थित अधिष्ठातृ चेतना देवी की अनन्त महिमा की किंचित झांकी पाकर आत्म विश्वासी बन सकता है। हम उसको उसके अनात्म विश्वासी होने पर दोषी नहीं ठहराते, क्योंकि जिस प्रकार हम जड प्रकृति को भी जिस ब्राह्मी चिति शक्ति की एक अभि-व्यक्ति कहते हैं, उसी प्रकार वह अनात्मवादी भी तो उसी का जड-चेतन-मय एक अर्ध विकसित स्तर है, जो समय पाकर अपनी अध्यात्म विकास यात्रा के किसी स्टेशन पर आत्मवादी हो जायगा।
श्री मच्छंकर भगवत्पाद ने भगवती उमा के सौन्दर्य का आनख शिख चित्र, एक भक्त के दृष्टिकोण से, उपासकों के ध्यान लाभार्थ