भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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२६६ सौंदर्य लहरी

उसके भीतर मोतियों की उत्पत्ति का वर्णन किया गया है, जिन की सदा समृद्धि होती रहती है और वह वंश अनादि अनन्त नित्य परंपरा वाला है।

भीतर से बाहर निकलने वाला श्वास निश्वास कहलाता है, और वह उष्ण होता है। यदि किसी मनुष्य का निश्वास शीतल चलने लगे, तो वह उसकी निकटस्थ मृत्यु का अरिष्टसूचक होता है। यहां भगवती का निश्वास शिशिरतर कहागया है, भगवती के परम शान्तिमय अन्तर्हृदय का यह पराक्रम है, जिस से मृत्यु को भी भय लगता है, और उसके परम शान्तिप्रद निश्वास के स्पर्श मात्र से उपासक शीघ्र जीवन मुक्ति का परमानन्द प्राप्त कर लेते हैं।

नासावंशः का अर्थ नासोपम वंशः भी किया जासकता है। किसी मनुष्य की यशः श्लाघा करते समय कहा करते हैं कि वह मनुष्य तो अपने कुल, जाति, वंश अथवा देश की नाक है, इसी प्रकार भगवती के उपासकों का वंश प्रकृति देवी की नाक है, ऐसा कहने से भगवती के उपासकों की सर्वोपरि गणना समझी जानी चाहिये जिन की वंशावलि में जीवन मुक्त महान पुरुषों की सदा समृद्धि होती रहती है। जिन में से कोई कोई प्रकाशित भी होजाते हैं, परन्तु गुप्त रूप से रहने वाले अनेक सन्तों के अस्तित्व की वे साक्षि देते रहते हैं। हिमगिरी के हिम शिखरों का शीतल शान्ति प्रद पवन ही मानो भगवती का कल्याणमय निश्वास है, जो श्रेय के जिज्ञासुओं को उत्तरोत्तर आवाहन करता रहता है।