भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

पृष्ठ 394, कुल 415 में से

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पृष्ठ 394

नोट:—मनुष्य देह ही श्रीचक्र है ।

मदंतिका मानिनी मंगला च सुभागा च सा सुन्दरी सिद्धिमत्ता । लज्जा मतिस्तुष्टिरिष्टा च पुष्टा लक्ष्मीरूमा ललिता लालपंती ॥६॥

पंचदशी कादिविद्या के प्रत्येक अक्षर के अनुसार १५ शक्तियों के नाम ये हैं:--

अर्थः—मदन्तिका, मानिनी, मंगला, सुभागा और वह सुन्दरीत्रिपुरा; सिद्धिमत्ता, लज्जा, मति, तुष्टि, इष्टा, और पुष्टा; लक्ष्मी, उमा, ललिता और लालपन्ती ।

इमां विज्ञाय सुधिया मदन्ती परिस्रुता तर्पयन्तः स्वपीठम् । नाकस्य पृष्ठे महतोवसन्ति परंधाम त्रैपुरं चाविशंति ॥७॥

अर्थः— इस विद्या को जानकर ( सुधारूपी ) मदिरा से मदन्ती को, उसकी पीठ (श्रीचक्र) में तृप्त ( प्रसन्न ) करने वाले महान पुरुष स्वर्ग के ऊपर वास करते हैं और त्रैपुर धाम में प्रवेश करते हैं ।

स्वपीठम् को निवसन्ति के साथ पढ़ने से इस प्रकार अर्थ समझना चाहिये कि मदन्ती को तृप्त करने वाले महान् पुरुष स्वर्ग के ऊपर उसकी पीठ में वास करते हैं, इत्यादि ।