सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 398, कुल 415 में से
संदर्भ में पढ़ें१२
सृण्येव सितया विश्वचर्षणिः पाशेनैव प्रतिबध्नात्यभीकाम्। इषुभिः पंचभिर्धनुषा च विधत्यादिशक्तिरुणा विश्वजन्या ॥१३॥
अर्थः—शर्करा के अंकुश से विश्व का आकर्षण करने वाली, पाश से क्रूरता का दमन करती है पांचबाणों से और धनुष से वह विश्व जननी आदि शक्ति अरुणा सबको नियन्त्रण में रखती है।
भगवती के चारों हाथों में अंकुश पाश, पांच बाण और धनुष हैं। और उसका वर्ण लाल है, इसलिये उसका नाम अरुणा है। अंकुश शर्करा का बना है, बाण फूलों के और धनुष ईख का। क्रोध को अंकुश, मोह को पाश, शब्द स्पर्श-रूपरसगंध को पांच बाण और मन को धनुष समझना चाहिये। मोह भी माधुर्य लिये होता है, भगवती का क्रोध भी मीठा होता है। मन में आनंद रूपी रस भरा रहता है और पांचों विषयों में भी मधुरता होती है।
भगः शक्तिर्भगवान्काम ईश उभा दातारविह सौभगानाम । समप्रधानौ समसत्वौ समोजौ तयोः शक्तिरजरा विश्वयोनिः ॥१४॥
अर्थः—भग शक्ति है, भगवान् कामेश दोनों यहां सौभाग्य के देने वाले हैं, दोनों समान रूप से प्रधान हैं, समान सत्व वाले हैं, और समान ओजस्वी हैं, ओजरा उनकी शक्ति है जो विश्व का कारण है।