सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२४
अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै मृडानी रुद्राणी शिव शिव भवानीति जपतः ॥ ८
अर्थ:-- हे चन्द्रमुखि जननि ! न मुझे मोक्ष की इच्छा है न संसारिक वैभव की इच्छा है, न विज्ञान की ही अपेक्षा है और न सुख की इच्छा, इसलिये यह ही याचना करता हूं कि मेरा जीवन 'मृडानी' रुद्राणी, शिव २ भवानी' इस प्रकार जप करता हुआ बीते ।
नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः किं रूक्षचिन्तनपरै र्न कृतं वचोभिः । श्यामे त्वमेव यदि किञ्चन मय्यनाथे धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव ॥९॥
अर्थ:-- हे श्यामे ! अम्बे ! मेरेसे न तो विधिपूर्वक तेरी विविध सामग्रियों से पूजा ही हुई है । और मेरी रूखे चिन्तन में लगी वाणी द्वारा क्या नहीं किया गया है ? तो भी यदि तूही मुझ अनाथ पर जो कुछ कृपा रखती है, हे मां वह तेरे लिये उचित है । (जो मुझ जैसे कुपात्र पर कृपा तो है ही)
आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि । नैतच्छठत्वं मम भावयेथा : क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥१०॥