सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
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अर्थः— हे दुर्गे, हे दया के सागर की ईश्वर ! आपत्तियों में डूबा हुआ मैं तेरा स्मरण करता हूं मेरी इसमें शठता है ऐसा मत समझना, क्योंकि क्षुधा और तृषा से दुःखी बालक ही माँ को याद करता है ।
जगदम्ब विचित्रमत्रकिं, परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि ।
अपराध परम्परावृतं, न हिमाता समुपेक्षते सुतम् ॥११॥
अर्थः— हे जगदम्ब ! इसमे यहां आश्चर्य ही क्या है कि मेरे ऊपर तेरी पूर्ण दया है; अपराधों पर अपराध करने रहने पर भी, माता पुत्र की उपेक्षा नहीं करती ।
मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि ।
एवं ज्ञात्वा महादेवि यथायोग्यं तथा कुरु ॥१२॥
अर्थः— मेरे समान कोई पापी नहीं, और तेरे समान पापों का नाश करने वाली दूसरी नहीं, ऐसा जानकर हे महा देवि, जैसा योग्य समझो वैसा करो ।
इति श्री शङ्कराचार्य विरचितं देव्यपराधक्षमा प्रार्थना स्तोत्रम् संपूर्णम् ॥