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सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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५६ सौंदर्य लहरी


ईश्वर कहा है, कहीं उसकी शक्ति, केवल नाम की भिन्नता है। शक्तिवादी उसको ईश्वर की दैवी शक्ति कह कर उपासना करते हैं, अन्य लोग उसे ईश्वर ही कहते हैं। वेदों में दोनों प्रकार का उपासना क्रम मिलता है कहा है—

‘ त्वमेव माता च पिता त्वमेव इत्यादि, त्वमेव सर्वं मम देव देव ’॥

मन्त्र शास्त्र के विद्वानों ने सृष्टि की उत्पत्ति शब्द से ही मानी है, और वे शब्द को अनादि शब्द ब्रह्म कहते हैं शब्द भी स्पन्द का ही रूप है। प्रथम शब्द ॐ है जो अ, उ, म के योग से बनता है। अकार सारी वैखरी वाणी की भूमि है। जिस पर अन्य वर्णों के नाम रूप रचे जाते हैं। ॐ भी अकार का ध्वन्यात्मसानुनासिक शब्द है। ऐतरेय अरण्यक में कहा है कि अकार ही समस्त वाणी है।

अकारो वै सर्वा वाक् सैषा स्पर्शान्तस्थोष्माभिर्व्यज्यमाना बह्वी नानारूपा भवति । (ऐ. आ. २.३ ७ १३)

अर्थात अकार ही सारी वाणी है। वह ही स्पर्शों, अन्तस्थ और उष्मा से युक्त होकर व्यक्त होती है और नाना रूपों वाली हो जाती है।

ऊपर हम बता आये हैं कि ऐं. ह्रीं, श्रीं, क्लीं भी ॐ के ही रूप हैं, और शक्ति प्रणव कहलाते हैं। उनका शक्ति और स्पन्द तथा संकल्प से सम्बन्ध भी वहां दिखाया जा चुका है। परन्तु सृष्टि के पूर्व चारों में से पहिले कौनसा उदय हुवा और पीछे कौनसा यह कहना असंभव है। जिस ऋषि ने जो क्रम समझा