भारतकोश
स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

Spanda Nirnaya of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

आचार्य वसुगुप्त / क्षेमराज द्वारा

DevanagariHindipublished519 पृष्ठ

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पृष्ठ 428

तृतीयः निष्यन्दः ३२७ भट्टकल्लट 'वृत्ति' में इस कारिका की व्याख्या इस प्रकार करते हैं— अनेनात्मस्वभावेन अधिष्ठिते व्याप्ते शरीरे सर्वज्ञतादयो यस्मात् तत्र स्वल्प यूकाभक्षणमपि क्षिप्रमेव जानाति, तथा स्वात्मन्यवहितस्य सर्वत्र सर्वज्ञता भविष्यति ।¹ स्वस्वभाव के द्वारा अपने इस शरीर पर अधिकार कर लेने से इसके विषय में जैसे सर्वज्ञता आदि गुणों की प्राप्ति हो जाती है—कोई छोटा सा कीड़ा छू जाय तो पता चल जाता है उसी प्रकार अपने स्वरूप, या स्वभाव पर आधिपत्य स्थापित हो जाने पर सर्वत्र सब कुछ ज्ञात हो जाता है । 'ज्ञानसंबोध' में कहा भी गया है—सब कुछ वही है क्योंकि वह व्यापक है । वह स्वभाव से ही सर्वज्ञ है । 'यह पुरुष सर्वज्ञ है'—इसी से सर्वज्ञता प्रस्फुटित होती है— इस संदर्भ में यह भी कहा गया है—यदि सबके हृदय में विद्यमान तुम सर्वदा सर्वज्ञ न होते तो भला, नष्ट पदार्थविषयक स्मृति किसी को कैसे होती? जन्म लेते ही बालक स्तनपान की शिक्षा किससे प्राप्त करता है? छोटे-छोटे जन्तुओं को जल में तैरना कौन सिखाता है? यह सब तुम्हारी सर्वज्ञता का ही उल्लास है— 'सर्वज्ञः सर्वदैव त्वं सर्वस्य हृदये न चेत् । केनाऽन्यथास्य संभाव्या नष्टार्थविषया स्मृतिः ॥ तदहर्जातबालैश्च स्तनपानं क्व शिक्षितम्? प्राणिभिर्वाप्सु तरणमेतत् सर्वज्ञ चेष्टितम् ॥' अन्य भी कहा गया है—जो निम्नांकित है— मधुमक्खी जब मधुसंचय करने लगती है तब उसको यह संवित् कैसे होती है कि मुझे किसका रस लेना चाहिए? किसका नहीं लेना चाहिए? कौन स्वादिष्ट है और कौन अस्वादिष्ट?—यह आपका ही विलास नहीं तो और क्या है? नन्हें-नन्हें कीड़े भी अपने भरण-पोषण की आश्चर्यजनक व्यवस्था कर लेते हैं । अज्ञानी पशु हाथी अपने ऊपर जल फेंककर स्नान करता है । वह किसके ज्ञान का फल है? भोले हिरनों को संगीत की पहचान कैसे होती है जिससे वे खाना-पीना भी भूल जाते हैं?—इस अनन्त संवित् का विलास हुए बिना चूहा बिल में रहते हुए भी बिल्ली से क्यों डरता है? विवेकरहित कछुआ पानी के भीतर छिप जाता है और अपने समस्त अंगों को समेट लेता है—यह बुद्धि उसे कहाँ से प्राप्त होती है? आत्मसंवित् ही तो मोर में बैठकर नाच रही है । पक्षी अगाध जल में कूदकर मछली पकड़ने का कौशल किससे सीखता है? हंस नीर से क्षीर का विवेक करने की संवित् किससे प्राप्त करता है? छोटा से छोटा जीव बोलकर अपनी भावना कैसे प्रकट करता है? प्रातःकाल 'आज यह-यह काम करना है'—ऐसा संकल्प कहाँ से उदय होता है? मूर्ख पशुओं को अपने सींग, दाँत और पंजे से दूसरों पर प्रहार करने की विद्या किसने १. भट्टकल्लटः स्पन्दकारिकावृत्ति (३९) ।