श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४६७ ) दादभ्युपदेशात् संप्रसादः-प्रत्यगात्मा "एष संप्रसादोऽस्माच्छरीरा- त्समुत्थाय परं ज्योति रूपसंपद्य स्वे रूपेणाभिनिष्पद्यते" इत्युपनिषद प्रसिद्धेः । संप्रसादात् प्रत्यगात्मनोऽधिकतया भूमविशिष्टस्य सत्य- शब्दाभिधेयस्योपदेशादित्यर्थः । सत्यशब्दाभिधेयं च परं ब्रह्म । उक्त संशय पर सूत्रकार "भूमासंप्रसादादध्युपेशात्" सूत्र बनाते हैं। अर्थात् भूमागुण विशिष्ट जीवात्मा नहीं है अपितु परमात्मा है। उक्त प्रसंग में, संप्रसाद से अधिक श्रेष्ठ भूमा का वर्णन किया गया है। संप्रसाद, जीवात्मा के लिए प्रयुक्त है जैसा कि--"यह संप्रसाद इस शरीर से उठकर, परंरूप को प्राप्त कर, स्वकीय तेजोमय रूप से संपन्न हो जाता है" इस उपनिषद् में प्रसिद्ध है। संप्रसाद जीवात्मा से अधिक सत्य शब्दाभिधेय भूमागुण विशिष्ट का उपदेश दिया गया है; सत्य शब्द से अभिधेय, एक मात्र परब्रह्म ही है। एतदुक्तं भवति-यथा नामादिषु प्राणपर्यन्तेषु पूर्वपूर्वाधिकतयो- त्तरोत्तराभिधानात् पूर्वेभ्य उत्तरेषामर्थान्तरत्वम्, एवं प्राण शब्द निर्दिष्टात् प्रत्यगात्मनोऽधिकतया निर्दिष्टः सत्य शब्दाभिधेयः तस्मादर्थान्तर भूत एव, सत्य शब्द निर्दिष्ट एव भूमेति सत्याख्यं परंब्रह्मैव भूमेत्युपदिश्यते इति । तदाह वृत्तिकारः- "भूमात्वेति- भूमा ब्रह्म नामादिपरम्परया आत्मन ऊर्ध्वमस्योपदेशात्" इति । कथन यह है कि--नाम से लेकर प्राण तक जिसका उल्लेख किया गया है, उसमें पूर्व वस्तु से पर वस्तु को, उत्कृष्ट कहा गया है। जिससे कि पूर्व पदार्थ से पर पदार्थ की पृथकता सिद्ध हो जाती है। उसी प्रकार प्राण शब्द निर्दिष्ट जीवात्मा से अधिक, सत्य शब्दाभिधेय तत्त्व, विशिष्ट स्वतंत्र तत्त्व है। सत्य शब्द से निर्दिष्ट भूमा ही है जो कि सत्य शब्दा- भिधेय परब्रह्म, के पर्याय रूप से वर्णन किया गया है। जैसा कि-- वृत्तिकार कहते हैं--"भूमा को जानो--इत्यादि में जिस भूमा को जानने की बात कही गई है वह, नाम आदि की परम्परा से उत्तरोत्तरो श्रेष्ठ, जीवात्मा से ऊपर की श्रेणी का, बतलाया गया है।" ankurnagpal108@gmail.com