श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीमते रामानुजाय नम ॥ शारीरक मीमांसा श्रीभाष्य अखिलभुवनजन्मस्थेमभङ्गादिलीले, विनतविविधभूतव्रातरक्षैकदीक्षे। श्रुतिशिरसि विदीप्ते ब्रह्मणि श्रीनिवासे, भवतु मम परस्मिन् शेमुषी भक्तिरूपा॥ समस्त विश्व की सृष्टि, स्थिति और लय रूप लीला करने वाले, 'शरणागत भक्त की रक्षा के लिए प्रतिश्रुत, उपनिषद् शास्त्र प्रतिपादित परब्रह्म श्रीनिवास वासुदेव में मेरी सतत भक्तिमयी मति हो। पाराशर्यवचःसुधामुपनिषद्दुग्धाब्धिमध्योद्धृतां संसाराग्निविदीपनव्यपगतप्राणात्मसंजीवनीम्। पूर्वाचार्यसुरक्षितां बहुमतिव्याघातदूरस्थिता-, मानीतान्तु निजाक्षरैःसुमनसो भौमाः पिबन्त्वन्वहम्॥ उपनिषद् शास्त्र रूप समुज्ज्वल क्षीरसागर से प्रकट, संसार रूप अग्निताप से तप्त, परमात्मज्ञान हीन संतप्त जनो की संजीवनी, पूर्वा- चार्य ( श्री द्रविडाचार्य ) से सुरक्षित, मतमतान्तरों के व्याघात से दुर्बोध, वेदान्ताचार्यों के व्याख्यानों से प्राप्त, पराशरपुत्र बादरायण की अमृतमय वाणी का भूलोक वासी विद्वज्जन निरन्तर पान करे। भगवद्बोधायनकृतां विस्तीर्णां ब्रह्मसूत्रवृत्तिं पूर्वाचार्याः संचिक्षिपुः तन्मतानुसारेण सूत्राक्षराणि व्याख्यास्यन्ते। भगवान् बोधायन कृत विस्तृत ब्रह्मसूत्र वृत्ति को पूर्वाचार्य ( श्री द्रविड ) ने संक्षिप्त किया, मैं उन्हीं के मतानुसार सूत्राक्षरों की व्याख्या कर रहा हूँ। ankurnagpal108@gmail.com