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श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

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५० ३. मुक्ति के समय देहाभाव में भी स्वेच्छा से भगवान के लीलारस आस्वादन का प्रतिपादन। मुक्त पुरुष की देहादि के सद्भाव में जाग्रतानुभूति का निरूपण। मुक्तावस्थ अणु स्वरूप आत्मा की अन्यत्र भोग संभावना का समर्थन। नित्य जीवात्मा की सर्वज्ञता का समर्थन। —पृ०११६७-१२०२ ६. जगद्व्यापारवर्जाधिकरण (सूत्र १७-२२) १. मुक्त पुरुष का जगत् सृष्टि आदि ईश्वरीय कार्यों से भिन्न कार्यों में अधिकार निरूपण। २. मुक्त पुरुष के निर्विकार ब्रह्मभोग का वर्णन। ३. मुक्त पुरुष की संसार पुनरावृत्ति का निराकरण पृ०१२०२-११

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