भारतकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished696 पृष्ठ

पृष्ठ 688, कुल 696 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 688

Here is the complete, line-by-line transcription of the text from the image into clean Devanagari Markdown:

( ५३८ ) ध्समस्तकाममनवधिकातिशयानन्दं स्वलीलोपकरणभूतसमस्तचिद- चिद्वस्तुजातशरीरतया तदात्मभूतंपरंब्रह्मस्वशरीरभूते प्रपंचे तन्मात्राहंकारादिकारणपरम्परया तमः शब्दवाच्यातिसूक्ष्म प्रचिद्व- स्त्वेकशेषेसति, तमसि च स्वशरीरतयाऽपि पृथङ्निर्देशानर्हाति- सूक्ष्मदशापत्त्या स्वस्मिन्नेकतामापन्ने सति तथाभूततमः शरीरं ब्रह्म पूर्ववद्विभक्त नामरूपचिदचिन्मिश्रप्रपंचशरीरं स्यामिति संकल्प्याप्य- यक्रमेण जगच्छरीरतया आत्मानं परिणामयतीति सर्वेषु वेदांतेषु परिणामोपदेशः । परमात्मा परिणाम स्वभाव वाला है इसलिए उसका विचित्र जगदाकार रूप से परिणत होना असंभव नहीं है। इस प्रसंग में परब्रह्म संबंधी जिस परिणाम का वर्णन है, वह उनके स्वाभाविक परिणाम का है, इसलिए दोषी वह नहीं है, इससे