श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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ग्यारहवाँ अध्याय 11/242-243 ] श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी कृपाभिलाषा चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ 243 ॥ करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका वर्णन कर रहा है ॥ 242-243 ॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते मध्यखण्डे 'बेड़ा-कीर्त्तन'-विलास-वर्णनं नाम एकादश परिच्छेदः। अनुवाद-इस प्रकार मैंने महाप्रभुके कीर्त्तन-विलासका वर्णन किया। (ग्रन्थकार आशीर्वाद कर रहे हैं) जो श्रीचैतन्यचरितामृतके मध्यखण्डमें 'बेड़ा-कीर्त्तन'-विलास-वर्णन इसका श्रवण करेगा, वह महाप्रभुका दास बन जायेगा। नामक ग्यारहवें अध्यायका अनुवाद समाप्त। । 463