श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1414, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ें[ किम्वा-गुण श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत किम्वा नवम पदार्थ 6/272 कृष्णप्राप्तिर उपाय बहुविध 8/82 कृष्णेर विलासमूर्त्ति 9/142 कीर्त्तनीयार परिश्रम जानि' 14/38 कृष्णप्रीत्ये करि तोमार 5/23 कृष्णेर विशुद्धप्रेम-रत्नेर 8/180 कीर्त्तिगण-मध्ये जीवेर 8/245 कृष्णप्रेम याँर, सेइ मुक्त 8/248 कृष्णेर मधुर वाणी 2/31 कु-विषय-विष्ठा-गर्त्ते 1/198 कृष्णप्रेमसेवा-फलेर परम 9/258 कृष्णेर-स्वरूप' कह राधार 8/118 कुलिया नगर हैते पथ 1/156 कृष्ण-प्रेमामृत पान करे 8/258 केमने संन्यास-धर्म हबेक 6/74 कृतघ्नता हय, तोमाय ना 5/20 कृष्णप्रेमा सुनिर्मल, येन 2/48 केशे धरि' विप्रे लञा 9/233 कृतमालाय स्नान करि' 9/181 कृष्ण-प्रेमे प्रतिष्ठा चले 4/147 केह ज्ञानी, केह कर्मी 9/9 कृपा करि' कह, यदि 8/95 कृष्ण-वंशी करे याँहा 14/226 केह हय तत्त्ववादी', केह 9/11 कृपा करि' कह, राय 8/196 कृष्णभक्ति बलिया याँहार 8/245 केह ताँरे पुत्र-ज्ञाने 9/129 कृपा-पाश गलाय बान्धि' 10/125 कृष्णभक्त-विरह बिना 8/247 केह सखा-ज्ञाने जिनि' 9/129 कृपा बिना ईश्वरेरे কেহ 6/82 कृष्णभक्त-सङ्ग बिना श्रेयः 8/250 कैशोर-वयस सफल कैल 8/188 कृपा बिना ब्रह्मादिक 13/59 कृष्णमूर्ति देखि' प्रभु 9/249 कोटि जन्मे तोमार ऋण 3/146 कृष्ण आजि निष्कपटे 6/232 कृष्ण याँहा धनी, ताँहा 14/220 कोन् अर्थ जानि' तोमार 9/97 कृष्ण उपदेशि' कर जीवेरे 7/148 कृष्णरस-तत्त्ववेत्ता, देह 10/111 कोन-जन्मे मोरे अवश्य 11/24 कृष्ण-कर-पदतल 2/34 कृष्ण लञा व्रजे याइ 1/56 कौतुके पुरी ताँरे पुछिल 9/294 कृष्ण कहे, - प्रतिमा चले 5/95 कृष्ण लागि' पति-आगे 12/32 कौतुके लक्ष्मी चाहेन 9/116 कृष्ण' कृष्ण' कहि करे 12/112 कृष्णलीला-मनोवृत्ति-सखी 8/176 क्रोध करि' रास छाड़ि' 8/111 कृष्णके आह्लादे, तांते 8/156 कृष्णलीलामृत यदि लताके 8/209 क्ष कृष्णके कराय श्यामरस 8/179 कृष्णसङ्गे पतिव्रता-धर्म 9/118 क्षणे क्षणे कर तुमि 11/190 कृष्णचैतन्य-निकटे याइ' 10/133 कृष्ण-सह निजलीलाय 8/206 क्षीर एक राखियाछि 4/127 कृष्णोते अधिक लीला 9/115 कृष्णसह राधिकार लीला 8/207 क्षीर लह एइ, यार 4/133 कृष्णदास'-नामे एइ सरल 7/39 कृष्णसुख-तात्पर्य गोपीभाव 8/216 ख कृष्णनाम, कृष्णकथा, कृष्ण 3/190 कृष्णस्फूर्त्त्ये ताँर मन 9/105 खण्ड खण्ड हैल भट्टारि 9/232 कृष्ण-नाम-गुण छाड़ि 1/270 कृष्णाश्रय हय, छाड़े वेद 11/117 ग कृष्ण-नाम-गुण-लीला 8/251 कृष्णे मति रहु' बलि' 6/48 गङ्गातीरे लञा गेला 'यमुना' 1/93 कृष्णनाम लोकमुखे शुनि' 7/117 कृष्णे सुख दिते करे 8/217 गङ्गाय यमुना बहे हञा 3/36 कृष्णनाम स्फुरे मुखे 10/176 कृष्णेर अधरामृत, कृष्ण 2/32 गन्ध बाड़े, तैछे एइ 4/192 कृष्णनाम स्फुरे, रामनाम 9/27 कृष्णेर अनन्त-शक्ति, ताते 8/150 गरुड़ेर पाशे राहि' दर्शन 6/63 कृष्णनाम हइल सङ्केत 12/113 कृष्णेर-उज्ज्वल रस 8/170 गान-मध्ये कोन् गान 8/249 कृष्णनामामृत-वन्याय देश 7/118 कृष्णेर दर्शन पाञा 13/124 गिरिधातु-शिखिपिच्छ-गुञ्जा 14/204 कृष्ण-नारायण, यैछे 9/153 कृष्णेर प्रतिज्ञा दृढ़ सर्व 8/90 गीताशास्त्रे जीवरूप शक्ति' 6/163 कृष्णनिषेवण करि निभृते 3/9 कृष्णेर विग्रह येइ सत्य 6/264 गुण-दोषोद्गार-छले सबा 7/32 कृष्णप्राप्ति-तारतम्य 8/82 कृष्णेर विरहलीला प्रभुर 1/51 570 ।