भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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पृष्ठ 1415

पद्य सूची गुण–जय ] गुणाधिक्ये स्वादाधिक्य ८/८६ गुरु–आज्ञा दियाछेन, कि १०/१४३ गुरु–आज्ञा ना लङ्घिये १०/१४४ गुरुकर्णे कह कृष्णनाम ९/५९ गुरु–कर्णे कहे सबे ९/६१ गुरुबुद्धये छोटविप्र बहु ५/३४ गुरुर किङ्कर हय मान्य १०/१४२ गृह–सहित आत्मा ताँरे १०/३२ गृहे रहि' कृष्णनाम ७/१२७ गोपजाति कृष्ण, गोपी ९/१३५ गोप–बालक सब प्रभुरे ३/१३ गोपालचम्पू–नामे ग्रन्थ १/४४ गोपाल–चरणे मागे,—चल ५/१२२ गोपाल यदि साक्षी देन ५/७७ गोपालेर आगे कह ए ५/३१ गोपालेर आगे पड़े ५/१११ गोपालेर सहजे प्रीति ४/९५ गोपिकार प्रेमे नाहि १४/१५७ गोपिकार मन हरिते ९/१४७ गोपी–आनुगत्य बिना ८/२२९ गोपीगण बिना कृष्णेरे १४/१२३ गोपीगणेर रास–नृत्य ८/१०४ गोपीचन्दन–तले आछिल ९/२४७ गोपीद्वारे लक्ष्मी करे ९/१५५ गोपीनाथ आमार से ४/१६० गोपीभावे विरहे प्रभु ११/६३ गोपी–रागाणुगा हञा ९/१३६ गोपी–लक्ष्मी–भेद ९/१५३,१५४ गोपेन्द्रसुत बिना तेंहो ८/२८६ गोविन्द–विरुदावली, ताहार १/४० गो–ब्राह्मण–द्रोहि–सङ्गे १/१९७ गोसाञिर सङ्गे रहे ९/२२६ गौड़–निकट आसिते नाहि १/२१२ गौड़ हइते आइला दुइ ४/१०३ गौर अङ्ग नहे मोर ८/२८६ गौर आगे चले, श्याम १३/११८ गौर यदि पाछे चले १३/११८ ग्राम्यवार्त्ता–भये द्वितीय ४/१७९ घ घरे आनि' प्रभुर कैल ७/१२२ घरे कृष्ण भजि' मोरे ७/६९ घरे याञा कर सदा ३/१९० घषिते घषिते यैछे मलयज ४/१९२ च चण्डीदास, विद्यापति, रायेर २/७७ चतुर्भुज–मूर्ति' देखाय ९/१४९ चतुर्भुज–रूप प्रभु हइला ६/२०२ चन्दनेश्वर' निजपुत्र दिल ६/३३ चब्बिश বৎসর शेष १/१६, ३/३ चर्म्माम्बर–परिधाने संसार १०/१५९ चातुर्मास्य महाप्रभु १/११० चापड़ खाञा कृ चापड़ मारिया तारे कैल १३/९५ चाले गोंजा तालपत्रे १/६६ 'चिच्छक्ति', 'मायाशक्ति' ८/१५० चित्त काढ़ि तोमा हैते १३/१४० चिदंशे 'सम्वित्' ६/१५९, ८/१५४ चिन्तामणिगण–दासी १४/२२१ चिन्तामणिमय भूमि रत्नेर १४/२२१ चिरदिने माधव मन्दिरे ३/११४ चुरि करि' राधाके निल ८/१०१ चैतन्य–गोसाञि याँरे बले १/२७ चैतन्यचन्द्रेर लीला–अगाध ९/३६३ चैतन्य–चरण बिना नाहि ६/२३७ चैतन्यचरित शुन श्रद्धा ९/३६१ चैतन्यचरित श्रद्धाय शुने ९/३६४ चैतन्य–प्रसादे मनेर ६/२२४ चैतन्यलीला–रत्न–सार २/८४ चैतन्यलीलार व्यास–दास १/१३ चैतन्य' सेव, चैतन्य' गाओ १/२९ चैतन्यें' ये भक्ति करे १/२९ चैतन्येर प्रिय येहाँ १/२६ चैतन्येर भक्तवात्सल्य ७/३० चैतन्येर सृष्टि–एइ प्रेम ११/९७ चौद्दभुवने वैसे यत जीव १/२६७ छ छि, छि, विषयीर स्पर्श १३/१८२ छोटविप्र बले,—ठाकुर ५/३३ छोट हञा मुकुन्द एबे ११/१४० ज जगत् निस्तारिले तुमि ६/२१३ जगत् ये मिथ्या नहे ६/१७३ जगतेर माता सीता ९/२०२ जगदानन्द चाहे आमा ७/२१ जगद्रूप हय ईश्वर ६/१७१ जगन्नाथ–अचल, तुमि १०/१६३ जगन्नाथ–दर्शने विचार ११/३८ जगन्नाथ'–नाम, पदवी ६/५१ जगन्नाथ–मग्न प्रभुर १३/११७ जगन्नाथ–मन्दिरे ना १/६३ जगन्नाथ मिश्र–पूर्वाश्रमे ९/३०१ जगन्नाथेर ब्राह्मणी, तँह ९/२९७ जगन्माता महालक्ष्मी ९/१८९ जगाइ माधाइ करियाछेन ११/४५ जगाइ–माधाइ हैते कोटी १/१९६ 'जज गग' 'जज गग' १३/१०४ जन्मकुलशीलाचार ना १२/१९२ जन्मे जन्मे तुमि दुइ १/२१५ जय जय महाप्रभु १/२७३ । 571