भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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पृष्ठ 1416

[ जल-ताहाते श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत जलपात्र-वस्त्र बहि' ७/४० | तबे जानि,-राधाय कृष्णे ८/१०२ | ताँरे प्रश्न कैल प्रभु ९/२५४ जानि' वा ना जानि' ३/१४७ | तबे प्रभु ब्रजे पाठाइल १/३१ | ताँ-सबार प्रसादे मिले १२/९ जीव-व्याप्य, ब्रह्म १०/१६८ | तबे महाप्रभु ताँर बुके १२/१४८ | ताँहा उपवास, याँहा नाहि ११/११४ जीवे ना सम्भवे एइ ८/४३ | तबे मायासीता अग्न्ये ९/२०७ | ताँहा गोपवेश, सङ्गे मुरली १३/१२९ जीवेर अस्थि-विष्ठा दुइ ६/१३६ | तबे सेइ कृष्णदासे गौड़े १०/७४ | ताँहा पुष्पारण्य, भृङ्ग १३/१२८ जीवेर जीवन चञ्चल २/२४ | तबे हासि' ताँरे प्रभु ८/२८१ | ताँहा बिना रासलीला ८/११३ जीवेर देहे आत्मबुद्धि ६/१७३ | तर्कनिष्ठ हृदय तोमार ६/१०० | ताँहार सन्तोषे भक्ति ५/२४ जीवेर निस्तार लागि' ६/१६९ | तर्क-प्रधान बौद्धशास्त्र ९/४९ | ताँहारे मलिन कैल एक १२/५४ जीयाओ आमार गुरु ९/५८ | तर्क-शास्त्रे जड़ आमि ६/२१४ | ता'ते सुगन्धि देह ८/१६५ ज्ञ | तर्केइ खण्डिल प्रभु, ना ९/४९ | तावत् तोमार सङ्ग ८/२३९ ज्ञान-कर्मपाश हैते हय ६/२८४ | तर्जनीते भूमे लिखे १३/१६५ | तावत् स्पर्शमणि केह ६/२७९ ठ | ताँर आज्ञाय करौं ताँर १/१३ | तामा, काँसा, रूपा, सोना ८/२९३ ठाकुरेर नासाते यदि ५/१२७ | ताँर एक योग्य पुत्र ९/२९९ | तार अनुसन्धान बिना १४/१६ ठेलितेइ चलिल रथ १३/१९० | ताँर ऐछे वाक्य स्फुरे ६/२७८ | तार अस्त्र तार अङ्गे ९/२३२ त | भट्ट कहे,-ताँर कृपालेश ११/१०२ | तार एक प्रेम-लेश ११/२५ तटस्थ हञा विचारिले ८/८३ | ताँर गुण गणिबे केमने ८/१८४ | तार पाछे पाछे गोपाल ५/१०१ तत्तत्पद-प्राधान्ये 'आत्माराम' ६/१९५ | ताँर गौरकान्त्ये तोमार ८/२६८ | तार प्रतिफल मोरे देह ३/१६५ तत्त्ववादिगण प्रभुके ९/२५० | ताँर ठाञि गोपालेर लुकान ४/७८ | तार मध्ये एक-मूर्त्तये ८/१०८ तत्त्ववादी-आचार्य-सब ९/२५४ | ताँर नव अर्थ-मध्ये ६/१९३ | तार मध्ये छय वत्सर १/१९, २३ तत्त्वमसि'-जीव-हेतु ६/१७५ | ताँ'र निन्दा हय यदि ३/१८१ | तार मुक्ति फल नह ६/२६५ तथापि आपन-गणे १३/१८५ | ताँर प्रतिज्ञा-मोरे ना ११/४८ | तार शुक्लपक्षे प्रभु करिला १/१६ तथापि आमार मन १३/१२७ | ताँर भक्तिवशे गोपाल ५/१२३ | तार शेष येइ रहे १/५१ तथापि चैतन्येर करे १/२८ | ताँर भ्रातृपुत्र नाम-श्रीजीव १/४२ | ताँरा दुइजन जानाइला १/१८४ तथापि तोमार गुणे १/२०४ | ताँर मन कृष्णमाया नारे ८/१२९ | तारुण्यामृत-धाराय स्नान ८/१६६ तथापि ना पाइल ब्रजे ८/२३० | ताँर येइ सुख, ताहा ३/१८५ | तारे ध्यान शिक्षा कराह १३/१४० तथापि बाहिरे कहे निष्ठुर १२/२२ | ताँर सङ्गे बहु आइला ८/१५ | तार्किक-मीमांसक, यत ९/४२ तथापि यवन जाति, ना १/२२३ | ताँर स्पर्श नाहि याय ९/११६ | तार्किक-शृगाल-सङ्गे १२/१८३ तथापि राधिका यत्ने ८/२११ | ताँर हस्त-स्पर्शं पुनः ४/७७ | ताहा खाञा तोमार सङ्गे ५/१०० तथापि लौकिकलीला, लोक १/२२५ | ताँरे ईश्वर करि' नाहि ९/१२८ | ताहातेइ अनुमानि ८/११५ तप करि' कैछे कृष्ण ९/१२२ | ताँरे देखि' महाप्रभुर कृष्ण १२/६० | ताहाते दृष्टान्त-उपनिषद् ८/२२२ तबे आमार मनोवाञ्छा १३/१३१ | ताँरे देखि' हय मोर ९/१०० | ताहाते दृष्टान्त-लक्ष्मी ८/२३० तबे केने पण्डित सब ११/१०१ | ताँरे ना देखिया व्याकुल ८/१११ | ताहाते प्रकट देखि स-वंशी ८/२६९ | ताँरे निराकार करि' करह ६/१४० | ताहाते विख्यात इँहो परम ६/७९ 572 |