भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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पृष्ठ 1420

[ प्रभु-भारती श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत प्रभु ताँरे देखि' जानिल ८/१६ प्रभु ना खाइले, কেহ १४/४० प्रभुभक्तगण-मध्ये हैला १२/६८ प्रभु भिक्षा कैल दिनेर ९/१८६ प्रभुर अत्यन्त मर्ममी, रसेर १०/१०२ प्रभुर कृपाय ताँर स्फुरिल ६/२०५ प्रभुर कृपाय हय ७/१०७ प्रभुर चरण-युगे दिल १२/१२२ प्रभुर निकटे आछे यत १२/७ प्रभुर भावानुरूप स्वरूपेर १३/१६७ प्रभुर साक्षात् आज्ञा ११/११३ प्रभुर सिद्धान्त কেহ ना ९/४४ प्रभुर संन्यास देखि' उन्मत्त १०/१०४ प्रभुरूप करि' करे वस्त्रेर १२/३८ प्रभुरे आसन दिया आपने ६/११९ प्रमाणेर मध्ये श्रुति-प्रमाण ६/१३५ प्रह्लादेश जय पद्मामुख ८/५ प्राकृत-इन्द्रियेर ताँरे देखिते ९/१९२ 'प्राकृत' निषेधि करे ६/१४१ प्राकृत-शक्तितो तखन ६/१४५ प्राण छाड़ा याय, तोमा ७/८ प्राणनाथ, शून मोर निवेदन १३/१३८ प्राते शय्याय बसि' आमि ११/११६ प्रेमा-प्रयोजन', वेदे तिन ६/१७८ प्रेम बिना कभु নহে १०/१८१ प्रेमभक्ति प्रवर्त्ताइला नृत्य १/२३ प्रेममय-वपु कृष्ण-भक्त १४/१५६ प्रेमावेशे तिन दिन आछे ३/३८ प्रेमावेशे पड़िला तुमि ५/१४९ प्रेमावेशे पथे तुमि हवे ७/३८ प्रेमे मत्त, -नाहि ताँर ४/२२ प्रेमेर परम-सार 'महाभाव' ८/१५९ प्रेमेर 'स्वरूप'-'देह' ८/१६१ फ फल्गु करि' मुक्ति' देखे ९/२६७ फाल्गुने आसिया कैल ७/४ फाल्गुनेर शेषे दोलयात्रा ७/५ ब बलगण्डि 'भोगे'र प्रसाद १४/२५ बसियाछेन ताते-येन ९/९९ बहिरङ्गा-माया, -तिने ६/१६० बहुजन्मेर पुण्यफले पाइ ७/४७ बाल्यकाल हैते तोमार ३/१६५ बाल्यकाल हैते मोर ९/२८ बाल्यकाले माता मोर ५/१२९ बाल्यावधि रामनाम-ग्रहण ९/२६ बाहिरे ना कहे, वस्तु ८/२६४ बाहिरे नागरराज, भितरे २/१९ बाहिरे वामता-क्रोध १४/१९६ बाहिरे विषज्वाला हय २/५० बाह्यान्तरे गोपीदेह व्रजे ९/१३४ बिना दाने एत लोक १/१६९ बिल्वमङ्गल कैल यैछे १०/१७७ बुझ, कि ना बुझ ६/१२५ बौद्धगणेर उपरे अन्न ९/५५ बौद्धाचार्य नव प्रश्न' सब ९/५० बौद्धाचार्येर माथाय थालि ९/५५ ब्रह्मण्यदेव! तुमि-बड़ ५/८८ ब्रह्म-शब्दे कहे पूर्ण ६/१४७ ब्रह्मसंहिता, कर्णामृत, दुइ १/१२० ब्रह्म-सायुज्य हैते ईश्वर ६/२६९ ब्रह्म हैते जन्मे विश्व ६/१४३ ब्रह्माके वेद येन पड़ाइल ८/२६३ ब्रह्माण्ड-भितरे हय १/२६७ ब्रह्मे, ईश्वरे सायुज्य दुइ ६/२६९ ब्राह्मण-समाज सब ९/३०५ ब्राह्मण-सेवा कृष्णरे ५/२४ ब्राह्मणेरे कहे, - तुमि ५/१०७ भ भक्तगण 'कृष्ण' कहे १२/८५ भक्तगणे सुख दिते 'ह्लादिनी' ८/१५७ भक्त ठाञि हार' तुमि १०/१७४ भक्ति बिना शास्त्रेर अन्य ६/२३७ भक्ति-शब्द कहिते मने ६/२७६ भक्तिसिद्धान्त ताते लिखियाछेन १/४३ भक्तिसिद्धान्त-विरुद्ध, आर १०/११३ भगवत्ता-लक्षणेर इँहातेइ ६/७८ भगवद्भक्तिविमुखेर हय दण्ड ६/२६३ भगवान् अनेक हैते यबे ६/१४५ भगवान्-'सम्बन्ध', भक्ति ६/१७८ भगवानेर सविशेषे एइ तिन ६/१४४ भजिलेह नाहि पाय ८/२२९ भट्ट कहे,-गुरुर आज्ञा १०/१४४ भट्ट कहे, -तुमि येइ ११/११२ भट्ट कहे,-महान्तेर एइ १०/१० भट्टथारि हैते इँहारे १०/६४ भट्टसङ्गे गोड़ाइल सुखे ९/८६ भट्टाचार्य कहे,-तेँहो १०/१५ भट्टाचार्य कहे,- 'भक्ति' ६/२६३ भट्टाचार्य, तुमि इँहार ६/७८ भट्टाचार्य प्रेमावेशे हैल ६/२०७ भट्टाचार्येर प्रार्थनाते प्रभु ६/१९३ भट्टाचार्येर वैष्णवता देखि' ६/२८० भागवत-भारत, दुइ ६/९७ भाग्यवान् तुमि-इँहार १३/९७ भावयोग्य देह पाञा ८/२२१ भारती-गोसाञि केनेन १०/१५७ भारती-सम्प्रदाय एइ ६/७२ 576 ।