भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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पद्य सूची भाल-याँहा ] भालकर्म देखि' तारे १२/११६ भालमते शोधन करह १२/९३ भाष्य कह तुमि-सूत्रेर् ६/१३१ भोगेर् समय लोकेर १३/२०१ भोजन करिलुँ, ना १२/१८९ म मणि यैछे अविकृते ६/१७१ मण्डली छाड़िया गेला ८/११३ मत्तगज भावगण, प्रभुर २/६४ मध्वाचार्य-ठाञि कृष्ण ९/२४७ मध्वाचार्य-स्थाने आइला ९/२४५ मनुष्येर वेश धरि' १/२६८ मने ना मिलिले करे १२/११६ मने भावेन, कुरुक्षेत्रे १/५३ मन्दिरेर चक्र देखि' ११/१९५ मन्दिर-निकटे याइते ११/१६५ मर्यादा हैते कोटि १०/१४० महा-अपराध कैनु गर्वित ६/२०० महाकुलीन तुमि-विद्या ५/२२ महानुभावेर चित्तेर स्वभाव ७/७२ महान्त-स्वभाव एइ ८/३९ महाप्रभु बिना केह नाहि १२/१८२ महाप्रभुर गुण गाञा १/२६९ महाप्रभुर भक्त, सब ११/६७ महाप्रभुर भक्त तैं हो ६/१८ महाभागवत देखे स्थावर ८/२७२ महाभाव-चिन्तामणि' ८/१६४ मात्सर्य छाड़िया मुखे ९/३६१ मातारे तावत् आमि ३/१७६ माने केह हय 'धीरा' १४/१४३ 'मायाधीश'-'मायावश' ६/१६२ मायावादि-भाष्य शुनिले ६/१६९ मायासीता' दिया अग्नि ९/२०५ मायासीता' रावण निल ९/२०४ माला-प्रसाद लञा याय ११/७४ मुकुन्द सेवन-व्रत कैल ३/७ मुकुन्द-सेवाय हय संसार ३/८ मुक्त-मध्ये कोन् जीव ८/२४८ मुक्ति, कर्म-दुइ वस्तु ९/२७१ मुक्तिपद-शब्दे साक्षात् ६/२७१ मुक्ति पदे याँर, सेइ ६/२७२ मुक्ति, भुक्ति वाञ्छे येइ ८/२५६ मुक्ति-शब्द कहिते मने ६/२७६ मुखे ना निःसरे वाणी ६/१८३ मुख्य' छाड़ि' लक्षणा'ते ६/१५१ मुख्यार्थ छाड़िया कर ६/१३४ मुञि तोमा छाड़िल १०/१२५ मुञि-नीच, अस्पृश्य ११/१८८ मूर्च्छित हञा आचार्य ९/५६ मूर्च्छित हञा सबे ७/९२ मूढ़ अधमजनेरे तैं हो १/३३ मो-बिनु दयार पात्र १/२०१ मोर अपराधे तोमार दण्ड ५/१५१ मोर आगे निजरूप ना ८/२७७ मोर कर्म, मोर हाते १/१९८ मोर गृहे 'प्रभुपदेर' हवे १०/२३ मोर जिह्वा-वीणायन्त्र ८/१३२ मोर प्रतिज्ञा-ताँहा बिना ११/४८ मोर मनेर कथा तुञि १/६९ मोर मनेर कथा रूप १/७१ मोर मुखे वक्ता तुमि ८/१९९ मोर लागि' प्रभुपदे करिबे १२/८ मोर श्लोकेर अभिप्राय ना १/६९ मोरे दया करि' कर १/२०२ मोरे ना धुँइह प्रभु ११/१५६ मोरे पूर्ण कृपा कैल ९/१६० म्लेच्छजाति, म्लेच्छसङ्गी १/१९७ म्लेच्छ-भये सेवक मोर ४/४२ य यत नद नदी यैछे १०/१८७ यत पिये, तत तृष्णा १२/२१५ यतेक विचारे, तत पाय ९/३६४ यदि मोरे कृपा ना १२/१० यदि सेइ महाप्रभुर ना ११/४९ यद्यपि असम्भाष्य बौद्ध ९/४८ यद्यपि आपनि हुये १/२८ यद्यपि आपने पूर्ण, सर्वैश्वर्य ११/१३५ यद्यपि ईश्वर तुमि परम १२/२९ यद्यपि गोपाल सब अन्न ४/७७ यद्यपि गोसाञि तारे हञाछे १२/१२४ यद्यपि जगद्गुरु तुमि ६/८५ यद्यपि वस्तुतः प्रभुर किछु १/२२५ यद्यपि मुक्ति हय एइ ६/२६६ यद्यपि राजारे देखि' हाड़िर १३/१८४ यद्यपि राय-प्रेमी ८/१२९ यद्यपि शुनिया प्रभुर १२/२२ यद्यपि सखीर कृष्ण ८/२११ यद्यपि सहसा आमि ३/१७५ यद्यपि सौन्दर्य कृष्ण ८/९३ यबे येइ रस, ताहा १३/१६७ याइते नारिल, विघ्न ३/१७४ याँर ठाञि कलाविलास ८/१८२ याँर पतिव्रता-धर्म ८/१८३ याँर मुखे कैल प्रभु ८/३१० याँर सद्गुण-गणने ८/१८४ याँर सौन्दर्यादि-गुण ८/१८३ याँरे कृपा करि' करेन ११/११७ याँहा ताँहा राधाकृष्ण ८/२७६ याँहा नेत्र पड़े, ताँहा १०/१७९ । 577

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