श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्य सूची साक्षि-हरि ] 'साक्षिगोपाल' बलि' ताँर ५/११८ | सेइ जल वंश-सहित ७/१२२ | सेइ सुखसमुद्रेर इँहा नाहि १३/१३० सातदिन कर तुमि वेदान्त ६/१२४ | सेइ जल लञा आपने १२/१२३ | सेइ से ए-सब लीला ७/११० साधारण-प्रेमे देखि' सर्वत्र ८/१०९ | सेइ त' ईश्वर-तत्त्व ६/८३ | सेइ से कर्त्तव्य, तुमि ६/१२२ साध्यवस्तु' साधन'-बिना ८/१९६ | सेइत' पराण-नाथ १/५५, १३/११३ | सेइ से ताँहारे कृष्ण' ११/१०२ साध्य-साधन आमि ना ९/२५५ | सेइ त' सुमेधा, आर ११/९९ | सेइ हैते कृष्णनाम ९/२७ साध्य-साधन-श्रेष्ठ जानाह ९/२५५ | सेइ दण्ड काँहा पड़िल ५/१५० | सेइ हैते भट्टाचार्येर ६/२३६ साध्वी हञा केने चाहे ९/११२ | सेइ दिन ताँर घरे ९/२० | सेइ हैते भाग्यवान् १२/६८ साम्प्रतिक दुइ ब्रह्म' इहाँ १०/१६३ | सेइ दुइर दण्ड हय ६/२६५ | सेकाले दक्षिण हैते १०/९१ सायुज्य' शुनिते भक्तेर हय ६/२६८ | सेइ दुइ स्थाप' तुमि ९/२७१ | से काले नाहि जन्मे ६/१४६ सार्वभौम कहे, - नीलाम्बर ६/५३ | सेइ देहे कृष्णसङ्गे ९/१३४ | से-मन्दिरे गोपालेर ५/१३ सार्वभौम परिवेशान करेन ६/४३ | सेइ नाम हइल तार १/१९५ | से मृत्तिका लय लोक १/१६५ सार्वभौम-सङ्गे मोर मन ८/१२४ | सेइ पञ्चम पुरुषार्थ ९/२६१ | से-विग्रहे कह सत्त्वगुणे ६/१६६ सार्वभौम हैला प्रभुर भक्त ६/२५७ | सेइ फेन लञा शुभानन्द १३/११० | सौभाग्य-तिलक चारु ८/१७५ सार्वभौमेर हैल महाप्रसादे ६/२३१ | सेइ बहिर्वास सार्वभौम १२/३७ | स्त्री-दरशन-सम विषेर ११/७ सिद्धदेहे चिन्ति' करे ८/२२८ | सेइ बुझे, दुँहार पदे ५/१५८ | स्त्रीधन देखाञा तारे लोभ ९/२२७ सिद्धान्त-शास्त्र नाहि ९/२३९ | सेइ ब्रह्म-बृहद्वस्तु ६/१३९ | स्थावर-जङ्गम देखे, ना ८/२७३ सिद्धिप्राप्तिकाले गोसाञि १०/१३३ | सेइ ब्रह्मे पुनरपि हये ६/१४३ | स्थावरदेह, देवदेह यैछे ८/२५६ सीतार आकृति-माया ९/१९३ | सेइ भाव, सेइ कृष्ण १/८० | स्नान करिबारे आइला ८/१४ सीता लञा राखिलेन ९/२०५ | सेइ महाभाव हय चिन्तामणि ८/१६३ | स्नेहवश हञा करे १०/१३९ सुखरूप कृष्ण करे सुख ८/१५७ | सेइ महाभावरूपा राधा ८/१५९ | स्नेह-भक्ति करि' किछु ६/१२० सुभद्रा-सहित देखे, वंशी १/८५ | सेइ याइ' अन्य ग्रामे ७/१०४ | स्नेह-सेवापेक्षा मात्र १०/१३९ सुराबिन्दु-पाते केह ना १२/५३ | सेइ वेष कैल, एबे ३/९ | स्वकल्पित भाष्य-मेघे करे ६/१३८ सूक्ष्म धूलि, तृण, काँकर १२/९३ | सेइ व्रजे पाये शुद्ध ९/१३१ | स्वतःप्रमाण वेद-वाक्ये ६/१७९ सूत्रेर अर्थ-भाष्य कहे ६/१३१ | सेइ शक्ति-द्वारे सुख ८/१५६ | स्वतःप्रमाण वेद सत्य ६/१३७ सूत्रेर मुख्य अर्थ ना ६/१३२ | सेइ शक्ति प्रकाशि' ७/१०९ | स्वमाधुर्ये सर्व चित्त ९/१२७ सूर्य येन उदय करि' १/२८० | सेइ शब्दे आमार गमन ५/९९ | 'स्वयं भगवान्' कृष्ण ९/१४१, ६/१४७, ९/१४७ सेइ अर्थ मुख्य, -व्याससूत्रे ६/१३३ | सेइ सती-प्रेमवती १३/१५३ | स्वरूप कहे, -याते जानिल १/७२ सेइ कृष्णे' गोपिकार नहे ९/१४९ | सेइसब आचार्य हञा ७/१०७ | स्वरूपेर इन्द्रिये प्रभुर १३/१६४ सेइ गोपीभावामृते याँर ८/२१९ | सेइ सब तत्त्ववस्तु हैल ८/११६ | स्वाद जानि' तैछे क्षीर ४/१२० सेइ छले निस्तारये सांसारिक १०/११ | सेइ सब तीर्थ स्पर्शि' ९/४ | स्वाभाविक तिन शक्ति ६/१५३ सेइ छले सेइ देशेर ९/४ | सेइ सब दयालु मोरे १२/८ | सेइ छिद्र अद्यापिह आछये ५/१३० | सेइ सब रसामृतेर 'विषय' ८/१४० | ह सेइ जन पाय व्रजे ८/२२० | सेइ साध्य पाइते आर ८/२०४ | हरिदास कहे, - आमि ११/१६५ । 581