भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

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पृष्ठ 1430

[ जर्जरित-नैतिक श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत ज जर्जरित-जो जर्जर हो गया हो त तत्त्वज्ञान-तत्त्ववस्तुका ज्ञान तत्त्वतः-यथार्थतः तत्त्वविद्-तत्त्वको जाननेवाला तदीय-भगवत्-सम्बन्धी तनय-पुत्र तन्मय-तल्लीन तादात्म्य-दो वस्तुओंके परस्पर अभिन्न होनेका स्वभाव तारतम्य-दो वस्तुओंके घट-बढ़कर होनेका भाव तिर्यग्-पशु-पक्षी तैलधारावत्-तैलकी भाँति धारावाला त्रिगुणातीत-तीनों गुणोंसे अतीत त्रिवर्ग-धर्म, अर्थ और काम द दिक्पाल-दश दिशाओंके रक्षक देवता दुर्ज्ञेय, दुर्बोध-कठिनाईसे जानने योग्य दुर्निगृहीत-कठिनाईसे वशमें लाया हुआ दुर्निवारित-कठिनाईसे निवारण किया हुआ दुरूह-कठिन दुस्त्याज्य-नहीं त्यागने योग्य देदीप्यमान-चकमता-दमकता हुआ देहाध्यास-देहमें मिथ्या अभिमान द्रव्यमययज्ञ-द्रव्य द्वारा किया गया यज्ञ द्विजवर-ब्राह्मणश्रेष्ठ द्वैतभाव-दो होनेका भाव ध धूसरित-धूलसे भरा हुआ ध्वनित होना-पता चलना न नराकृति-मनुष्यके समान आकृति नामाभास-नामका आभास निःशक्तिक-शक्तिरहित निःश्वास-प्राणवायु या साँसका बाहर निकलना निःसृत-निकला हुआ निकृष्ट-तुच्छ निकेतन-घर निक्षेप करना-फेंकना निगृहीत-निग्रह किया हुआ निग्रह-संयम निन्तान्त-अत्यन्त, एकदम निमज्जित-डूबा हुआ, स्नात नियमाग्रह-नियम-पालनमें आलस्य निरञ्जन-निर्दोष, अज्ञानसे रहित निरपेक्ष-किसी औरकी अपेक्षा नहीं निर्गत-बाहर निकला हुआ निर्गुण-सत्त्व, रज और तमोगुणसे अतीत निर्दिष्ट-निर्देशित निर्वाण-मोक्ष निर्विकल्प-विकल्पसे रहित निर्विवाद-बिना विवादका निरुद्ध-विशेषरूपसे रोका हुआ निरूपक-निरूपण करनेवाला निरूपण-किसी विषयको ठीक-ठीक समझा देना निशा-रात्रि निष्काम कर्म-कामनासे रहित कर्म निष्पन्न-जिसकी उत्पत्ति हुई है निसर्गवाद-प्रकृतिवाद (प्रकृति ही जगत्‌की सृष्टि करनेवाली है, ऐसा मतवाद) निस्तारक-निस्तार करनेवाला निस्त्रैगुण्य-तीनों गुणोंसे अतीत निहत-मारा हुआ नीलमणि-नीलम नैतिक-नीति-सम्बन्धी 586 |