भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 1442, कुल 2549 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1442

अमृतप्रवाह भाष्यमें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका ईशोपनिषद्—25/99; उद्भटचन्द्रिका—20/3; चैतन्यचन्द्रोदय-नाटक—16/205-210; चैतन्यचरितकाव्य—16/205-210; चैतन्यभागवत—16/55-56, 81, 205, 210, 212; चैतन्यमङ्गल—16/205-210; पद्यावली—19/92; प्रेमदासका भाष्य—16/205-210; भक्तिरसामृतसिन्धु—22/111-125; भागवत—15/265, 19/142, 24/28; भागवतामृत—20/165; सात्वत तन्त्र और शैवतन्त्र—20/173; हरिभक्तिसुधोदय—22/21 । अनुभाष्यमें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका आग्नेय पुराण—15/9; उपदेशामृत (रूपगोस्वामीकृत)—15/106, 111, 16/74, 19/102, 157; ऋग्वेद—23/110, 24/21; कर्णामृत—22/21; काशीखण्ड—17/82; कृष्णगणोद्देशदीपिका—15/241; कृष्ण-सन्दर्भ—23/111, 112; गरुड़-पुराण—15/274; गोपालतापनी-उपनिषद्—8/137; गीता—24/326; चैतन्यचन्द्रोदय-नाटक (टिप्पनी)—16/207; चैतन्यभागवत—16/207, 208; 5/140; चैतन्यमङ्गल (श्रीलोचनदास)—16/207; तत्त्व-सागर—24/326; दुर्गम-सङ्गमनी—17/95; नीलकण्ठ टीका—23/110; न्यासादेश विवरण—18/47; पद्मपुराण—15/167-169; 18/116; 20/242; 24/326; पद्यावली—17/145; प्रेमदास—16/207; ब्रह्मसंहिता—20/272-273; ब्रह्मसूत्र-भाष्य—18/47; 8/266, 308-310; भक्तिरत्नाकर—18/26, 38, 47, 49-52, 57-64, 66-68, 70-72; भक्तिरसामृतसिन्धु—15/108; 16/74, 238; 17/95; 19/177-178, 180, 183-185, 187-188; 22/65-67; 23/42-44, 46, 48, 52; भक्तिसन्दर्भ—15/107, 108, 261; 16/74; 18/115; 22/98; भागवत—15/106, 107, 261-262, 264, 274-277; 16/74, 280-281; 17/14-15, 55-56, 95, 186; 18/115; 19/17, 151, 189; 20/63, 127, 245, 248, 278, 332-333; 21/11, 19; 22/31-32, 37-39, 69, 98; 23/111-112; 24/166, 172, 326; 25/131-132; भावार्थ-दीपिका—24/326; मथुराखण्ड—18/38; मथुरा-माहात्म्य—18/58-62; मनुसंहिता—16/150, 20/59; 23/111-112; महाभारत—16/150; 20/59; 23/111-112; महाभारत-टीका (नीलकण्ठ)—23/1110; 24/326; मुक्ताफलटीका—20/59; मुण्डकोपनिषद्—19/17, 139; रागवर्त्म-चन्द्रिका—20/393-395; लघुभागवतामृत—20/165, 184; 21/33, 59-89; 23/111-112; लघुभागवतामृत-टीका (बलदेव)—23/111-112; वराह-पुराण—18/55; विद्वन्मण्डल—18/47; विष्णुपुराण—23/111-112; वैष्णव-मञ्जूषा—18/49; शिक्षाष्टक—16/74; शृङ्गाररसमण्डल—18/47; श्वेताश्वतरोपनिषद्—22/126; श्रुति—22/126; 24/314; सर्वसम्वादिनी—23/111-112; सांख्यकारिका—20/278; सिद्धान्त-शिरोमणि—20/218; 21/84; सिद्धार्थ-संहिता—20/224-236; सुबोधिनी-टिप्पणी—18/47; सूर्यसिद्धान्त—21/84; स्कन्दपुराण—15/261; स्तवावली—18/26, 38, 66; स्मृति—22/126; 24/364; हयशीर्ष-पञ्चरात्र—20/238, 239; हरिवंश—23/110; हरिभक्तिविलास—15/108, 261; 20/202; 24/324, 330-332, 337 । ii ।