श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअमृतानुकणामें उद्धत ग्रन्थादि-तालिका कृष्ण-सन्दर्भ—23/112-113; गीता—15/48; 22/90, 152-153, 23/112-113; छान्दोग्योपनिषद्—20/127-128; दशमूल—22/80; पद्मपुराण—21/125; बृहन्नारदीयपुराण—22/80; ब्रह्मपुराण—23/112-113; ब्रह्माण्डपुराण—21/33; भक्तिरसामृतसिन्धु—22/80, 22/148-149, 152-153; भागवत—21/33, 22/84, 152-153, 23/112-113; मन्त्रार्थ-दीपिका—21/125; रागवर्त्म-चन्द्रिका—22/148-149; वर्णागम-भास्वत्—21/125; विष्णुपुराण—23/112-113; श्रीचैतन्यशिक्षामृत—22/103-104, 152-153; श्रीलघुभागवतामृत—21/33; 23/112-113; स्कन्दपुराण—23/112-113।
अमृतानुकणिकामें उद्धत ग्रन्थादि-तालिका कूर्मपुराण—15/136; गीता—20/118; बृहद्भागवतामृत—18/34; भागवत—18/34; 19/157; 22/107; विष्णुपुराण—25/191-193; शिक्षाष्टक—19/157; श्रीगान्धर्वासंप्रार्थनाष्टकम्—21/112; श्रीहरिभक्तिविलास—15/236।
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