श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1445, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंभेजना तथा बादमें पुरीमें आकर पुनः मिलनेका आदेश देकर महाप्रभुका काशीमें आगमन।
बीसवाँ अध्याय— 221-289 सनातनका कारागारसे छूटकर निकल जाना, काशीमें गमन और चन्द्रशेखरके घरमें महाप्रभुसे मिलन, श्रीसनातन शिक्षा—(1) 'सम्बन्ध ज्ञान'—(क) जीवके और भगवान्के स्वरूपका वर्णन।
इक्कीसवाँ अध्याय— 291-324 (ख) कृष्णैश्वर्य-माधुर्य-वर्णन।
बाइसवाँ अध्याय— 327-375 (2) वैध और रागानुग-भेदसे 'अभिधेय'-साधन- भक्तिका वर्णन।
तेइसवाँ अध्याय— 377-407 (3) 'प्रयोजन'-प्रेम-तत्त्व-वर्णन।
चौबीसवाँ अध्याय— 409-474 “आत्मारामश्च”-श्लोककी 61 प्रकारकी व्याख्या, श्रीमद्भागवतके माहात्म्यका कीर्तन, वैष्णव-स्मृति हरिभक्तिविलासका मूल सूत्र-वर्णन।।
पचीसवाँ अध्याय— 477-519 प्रमुख-प्रकाशानन्द और काशीवासियोंके द्वारा महाप्रभुकी निन्दा, भक्तोंकी इच्छा पूर्ण करनेके लिये उनका उद्धार (आदिलीला सातवाँ अध्याय देखें), एकत्रित हुए समस्त कुतार्किकोंके कुतर्कोंका खण्डन, सभीके द्वारा महाप्रभुको साक्षात् नारायण मानना, प्रकाशानन्दके एक शिष्यके द्वारा महाप्रभुके प्रचारित मतकी अर्थात् श्रुतियोंकी अवरोहपन्यासे और सविशेष- ब्रह्मतत्पर्य एवं शक्तिपरिणामवादकी प्रशंसा तथा निर्विशेष-ब्रह्मपरता विवर्त्तवाद या आरोहवादपन्थाकी निन्दा, प्रकाशानन्दके द्वारा उस वाक्यका समर्थन, अन्य दार्शनिक मतवादोंका खण्डन, महाप्रभुका दर्शन, महाप्रभुके द्वारा पाषण्ड-संज्ञाका निर्देश, प्रकाशानन्दको उनकी प्रार्थनापर महाप्रभुके द्वारा चतुःश्लोकीकी व्याख्या, उसके बाद “आत्मारामश्च” श्लोककी 61 प्रकारकी व्याख्या, काशीवासियोंका उद्धार-साधन, सनातनको वृन्दावनमें भेजना, सुबुद्धिरायको निरन्तर कृष्णनाम- ग्रहण-व्यवस्था प्रदान, पुरीमें पुनः लौटकर आना और भक्तोंके साथ मिलन।
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