श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 1615
अठारहवाँ अध्याय 18/229 ] श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ 229 ॥ वर्णन कर रहा है ॥ 229 ॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते मध्यखण्डे श्रीवृन्दावनदर्शन-विलासो नाम अष्टादश-परिच्छेदः। श्रीचैतन्यचरितामृतके मध्यखण्डमें श्रीवृन्दावनदर्शन-विलास अनुवाद—श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी नामक अठारहवें अध्यायका अनुवाद समाप्त। । 169