भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

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पृष्ठ 1704

[ 20/223–236 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत मध्यलीला

अनुभाष्य-चौबीस मूर्तियाँ-1) वासुदेव, 2) सङ्कर्षण, 3) प्रद्युम्न, 4) अनिरुद्ध, 5) श्रीकेशव, 6) श्रीनारायण, 7) माधव, 8) श्रीगोविन्द, 9) विष्णु, 10) मधुसूदन, 11) त्रिविक्रम, 12) वामन, 13) श्रीधर, 14) हृषीकेश, 15) पद्मनाभ, 16) दामोदर, 17) पुरुषोत्तम, 18) अच्युत, 19) नृसिंह, 20) जनार्दन, 21) हरि, 22) कृष्ण, 23) अधोक्षज और 24) उपेन्द्र ॥ 223 ॥ परव्योममें दूसरे-चतुर्व्यूहके अस्त्रभेद :- वासुदेव-गदा-शङ्ख-चक्र-पद्मधर। सङ्कर्षण-गदा-शङ्ख-पद्म-चक्रधर ॥ 224 ॥ प्रद्युम्न-चक्र-शङ्ख-गदा-पद्मधर। अनिरुद्ध-चक्र-गदा-शङ्ख-पद्मकर ॥ 225 ॥ परव्योमे वासुदेवादि-निज निज अस्त्रधर। ताँर मत कहि, ये-सब अस्त्रकर ॥ 226 ॥ अनुवाद-भगवान् श्रीवासुदेव अपने नीचेवाले दायें हाथमें गदा, ऊपरवाले दायें हाथमें शङ्ख, ऊपरवाले बाँयें हाथमें चक्र और नीचेवाले बाँयें हाथमें पद्म (कमल) धारण करते हैं। सङ्कर्षण अपने नीचेवाले दायें हाथमें गदा, ऊपरवाले दायें हाथमें शङ्ख, ऊपरवाले बाँयें हाथमें पद्म और नीचेवाले बाँयें हाथमें चक्र धारण करते हैं। प्रद्युम्न अपने नीचेवाले दायें हाथमें चक्र, ऊपरवाले दायें हाथमें गदा, ऊपरवाले बाँयें हाथमें शङ्ख और नीचेवाले बाँयें हाथमें पद्म धारण करते हैं। अनिरुद्ध अपने नीचेवाले दायें हाथमें चक्र, ऊपरवाले दायें हाथमें गदा, ऊपरवाले बाँयें हाथमें शङ्ख और नीचेवाले बाँयें हाथमें पद्म धारण करते हैं। परव्योममें श्रीवासुदेवादि अपने-अपने अनुसार अपने हाथोंमें अस्त्रोंको धारण करते हैं। मैं सिद्धार्थ-संहिताके मतानुसार यह वर्णन कर रहा हूँ॥ 224-226 ॥ परव्योममें बाकी बीस मूर्तियोंके अस्त्र-भेदका वर्णन :- श्रीकेशव-पद्म-शङ्ख-चक्र-गदाधर। नारायण-शङ्ख-पद्म-गदा-चक्रधर ॥ 227 ॥ श्रीमाधव-गदा-चक्र-शङ्ख-पद्मकर। श्रीगोविन्द-चक्र-गदा-पद्म-शङ्खधर ॥ 228 ॥ विष्णुमूर्ति-गदा-पद्म-शङ्ख-चक्रकर। मधुसूदन-चक्र-शङ्ख-पद्म-गदाधर ॥ 229 ॥ त्रिविक्रम-पद्म-गदा-चक्र-शङ्खकर। श्रीवामन-शङ्ख-चक्र-गदा-पद्मधर ॥ 230 ॥ श्रीधर-पद्म-चक्र-गदा-शङ्खकर। हृषीकेश-गदा-चक्र-पद्म-शङ्खधर ॥ 231 ॥ पद्मनाभ-शङ्ख-पद्म-चक्र-गदाकर। दामोदर-पद्म-चक्र-गदा-शङ्खधर ॥ 232 ॥ पुरुषोत्तम-चक्र-पद्म-शङ्ख-गदाधर। श्रीअच्युत-गदा-पद्म-चक्र-शङ्खधर ॥ 233 ॥ श्रीनृसिंह-चक्र-पद्म-गदा-शङ्खधर। जनार्दन-पद्म-चक्र-शङ्ख-गदाकर ॥ 234 ॥ श्रीहरि-शङ्ख-चक्र-पद्म-गदाकर। श्रीकृष्ण-शङ्ख-गदा-पद्म-चक्रकर ॥ 235 अधोक्षज-पद्म-गदा-शङ्ख-चक्रकर। उपेन्द्र-शङ्ख-गदा-चक्र-पद्मकर ॥ 236 ॥ अनुवाद-(सबके अस्त्र धारण करनेवाले हाथोंका क्रम इस प्रकार है-नीचेवाला दाहिना हाथ, ऊपरवाला दाहिना हाथ, ऊपरवाला बायाँ हाथ और नीचेवाला बायाँ हाथ) श्रीकेशव-पद्म, शङ्ख, चक्र और गदा धारण करते हैं। श्रीनारायण-शङ्ख, पद्म, गदा और चक्र धारण करते हैं। श्रीमाधव-गदा, चक्र, शङ्ख और पद्म धारण करते हैं। श्रीगोविन्द-चक्र, गदा, पद्म और शङ्ख धारण करते हैं। विष्णुमूर्ति-गदा, पद्म, शङ्ख और चक्र धारण करते हैं। मधुसूदन-चक्र, शङ्ख, पद्म और गदा धारण करते हैं। त्रिविक्रम-पद्म, गदा, चक्र और शङ्ख धारण करते हैं। श्रीवामन-शङ्ख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं। श्रीधर-पद्म, चक्र, गदा और शङ्ख धारण

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