भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 1965, कुल 2549 में से

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पृष्ठ 1965

पचीसवाँ अध्याय 25/276 ] आदृतं, यतः [इदं] तैः (असद्भिः) अलभ्यं (लब्धुमशक्यम्); श्लोक-भावानुवाद-अमृतप्रवाह भाष्य देखें ॥ 276 ॥ इह (अत्र) मे (मम) इयं का क्षतिः (हानिः)?- यत् (यत्र) पचीसवें अध्यायका अनुभाष्य समाप्त। सहृदयसुमनोभिः (निष्कपटैः सुधीभिः ऐकान्तिकचित्तैः) समन्तात् (सर्वतः) स्वादितं (सत्) एषां (सुमनसां) मोदं तनोति मध्यलीला समाप्त (विस्तारयति)। । 519

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