श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1976, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ें[ अस्वा-एइ श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत मध्यलीला अस्वास्थ्येर छद्म करि' 19/15 | आपनारे 'पालक' ज्ञान, कृष्णे 19/227 | इष्टे 'आविष्टा'—तटस्थ 22/147 अहङ्कारेर अधिष्ठाता 20/256 | आपने ईश्वर तबे अंशो 20/305 | इँहा कर गोपीनाथ 16/132 “अहमेव”—श्लोके 'अहम्' 25/112 | आपने करिल प्रभुर पाद 19/85 | इहाते दृष्टान्त—यैछे 20/127 अहिंस-यम-नियमादि 22/141 | आपने भट्ट करेन प्रभुर 19/90 | इहा नाहि जानि—केमने 20/102 आ | आवेशे तार गाये प्रभुर 17/28 | इँहा माली सेचे नित्य 19/155 आकार-वर्ण-अस्त्रभेदे 20/172 | आमाते ये 'प्रीति', सेइ 25/122 | इहार घरेर आय-व्यय 15/96 आकाशादि गुण येन 19/232 | आमा वइ जगते आर 21/65 | इहार प्रसादे पाइबा 25/263 आकाशेर 'शब्द'-गुण येन 19/216 | आमार उद्धार-हेतु तोमार 20/64 | इहार श्रवणे भक्त जानेन 24/348 आकृति, प्रकृति, स्वरूप 20/355 | आमार कृपाय एइ सब 25/106 | इहा हैते पाबे सूत्र 25/146 'आकृत्ये' तोमारे देखि' 18/118 | आमार प्राण रक्षा कर 20/32 | इँहो ना स्पर्शिह, इँहो 19/69 आ-चण्डाल आदि कृष्णभक्ति 15/41 | आमार शपथ, यदि आर 16/141 | ई आचार्य 'कल्पना' करे 25/26 | आमा सबार कृष्णभक्ति 15/116 | ईश्वरज्ञान, सम्भ्रम-गौरव 19/219 आचार्य-कल्पित अर्थ 25/27 | आमा-हेन येबा केह 24/318 | ईश्वर-स्वभाव' तोमार 18/119 आचार्य हइल सेइ, तारिल 18/122 | आमि त' बाउल, आन 21/146 | ईश्वरेर शक्त्ये सृष्टि 20/261 आजि-कालि करि' उठाय 16/10 | 'आमि—बड़ ज्ञानी'—एइ 18/203 | उ आज्ञा देह', याइ' करि 18/99 | आमि—विज्ञ, एइ मूर्खे 22/39 | उच्छृङ्खल-लोक-सङ्गे 17/121 आत्मार 'आत्मा' हन 20/161 | आमि बोझा बहिमु, तोमा 25/163 | 'उत्तम-अधिकारी' सेइ 22/65 आत्मारामेर मन हरे तुलसीर 17/141 | आमि—'सम्बन्ध'-तत्त्व 25/101 | 'उत्तम', 'मध्यम', 'कनिष्ठ' 22/64 'आत्मा'-शब्दे कहे कृष्ण 24/73 | आर कृष्णनाम लैते कृष्ण 25/193 | 'उत्तम हञा हीन करि' 16/264 'आत्मा'-शब्दे कहे 24/279 | आर तिनयुगे ध्यानादिते 20/341 | उत्तर ना आइसे मुखे 18/188 'आत्मा'-शब्दे कहे 24/302 | आर 'नाम' लइते कृष्ण 25/192 | 'उत्तरे' खुदिले आछे 20/134 'आत्मा'-शब्दे ब्रह्म 24/11 | आर यत मत, सेइ 25/44 | 'उद्घूर्णा', 'चित्रजल्प' 23/55 'आत्मा' शब्दे 'मन' 24/159 | आर सब स्वरूप—'पूर्णतर' 20/400 | उद्घूर्णा, विरह-चेष्टा 23/57 'आत्मा'-शब्दे 'बुद्धि' 24/180 | आर्त्त, अर्थार्थी,—दुइ सकाम 24/90 | उदार महती याँर सर्वोत्तमा 24/190 आदि-चतुर्व्यूह-केह 20/189 | आर्य, सरल तुमि—वृद्ध 17/165 | उपजिय़ा बाड़े लता ब्रह्माण्ड 19/153 'आद्य एव परो रसः'—कहे 19/104 | आसक्ति हैते चित्ते जन्मे 23/12 | उपदेश लञा करे कृष्ण 25/21 आद्योपान्त चैतन्यलीला 18/226 | इ | उपाड़े वा छिण्डे, तार 19/156 आध्यात्मिकादि तापत्रय तारे 22/13 | इच्छा-ज्ञान-क्रिया बिना 20/254 | उपाध्याय, श्रेष्ठ मान' 19/101 आन कथा ना सुने काण 21/144 | 'इच्छाशक्ति', 'क्रियाशक्ति' 20/252 | 'उरुक्रम'-शब्दे कहे, बड़ 24/19 आनुकूल्ये सर्वेन्द्रिये कृष्ण 19/168 | इच्छाशक्ति-प्रधान कृष्ण 20/253 | ए आनेर वैभव-सत्ता 21/120 | 'इत्थम्भूत'-शब्देर अर्थ 24/36 | ए अन्य गोविन्द—नहे 20/196 आपन-'प्रारब्धे' वसि वाराणसी 17/95 | इन्द्रगण आइला लक्ष 21/68 | एइ अमृत अनुक्षण 25/269 आपनार हिताहित किछुइ 20/100 | इष्टे 'गाढ़-तृष्णा'—रागेर 22/147 | 530 |