श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1991, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्य सूची स्व-हेला ] स्वचरणामृत दिया 'विषय' 22/39 स्वरूपशक्ति शक्ति-कार्येर 20/150 हस्ती-व्याघ्र पथ छाड़े 17/25 'स्वतन्त्र ईश्वर' तुमि-स्वयं 17/79 स्वर्ग, मोक्ष कृष्णभक्त 19/214 हास्य, अद्भुत, वीर, करुण 19/187 'स्वयं-भगवत्ता', 'प्रकाश' 24/80 'स्वसौभाग्य' याँर नाम 21/104 'हिन्दु' हैले पाइताम 16/182 'स्वयं भगवान्', आर 20/240 स्व-स्व-मत स्थापे 25/54 हिरण्यगर्भ-अन्तर्यामी 20/292 स्वयं भगवान् कृष्ण 20/155 स्वाङ्ग-विशेषाभासरूपे 20/273 'हिरण्य', 'गोवर्धन',-दुइ 16/217 स्वयंरूप, तदेकात्मरूप 20/165 स्वाभाविक कृष्णेर तिन 20/109 'हेतु'-शब्दे कहे-भुक्ति 24/27 'स्वयंरूप' 'स्वयंप्रकाश' 20/166 हेनकाले 'अमोघ' 15/245 स्वयंरूपेर गोपवेश, गोप 20/177 ह हेनकाले व्याघ्र तथा आइल 17/37 'स्वरूप' अनुभवि' ताँरे 25/8 हेन कृष्ण छाड़ि' पण्डित 22/92 स्वरूप-ऐश्वर्यपूर्ण, कृष्ण 20/315 हरिभक्त्ये हिंसा-शून्य 24/266 हेन-तोमार एइ जीव 16/184 'स्वरूप'-लक्षण, आर 20/354 'हरि:'-शब्दे नानार्थ, दुइ 24/55 हेलाय 'मुक्ति' पाबे, पाबे 25/147 'स्वरूप'-लक्षणे तुमि 18/126 हस्तिगण-मध्ये येन 21/69
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