श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 2006, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्रीश्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला उद्धृत प्रमाण-ग्रन्थ तालिका अभिज्ञान-शकुन्तल-नाटक—18/40; आर्य्यशतक—16/74; इतिहास-समुच्चय—16/25; उज्ज्वलनीलमणि—14/16, 53; उपपुराण—3/82; काव्यप्रकाश—1/78; कृष्णकर्णामृत—17/51; कृष्णचैतन्योक्त श्लोक—6/239, 285; 20/12, 16, 21, 29, 32, 36, 39, 47; कृष्णसन्दर्भ—7/80; गीतगोविन्द—15/84; गोविन्दलीलामृत—15/14, 63, 78, 119; 17/40; 19/91; गोस्वामीपादोक्त श्लोक—14/41; चैतन्यचन्द्रोदय नाटक—6/263, 264; नाटकचन्द्रिका—1/135; नामकौमुदी—7/80; नृसिंहपुराण—3/56; 16/52, 53; नैषधी—1/92; न्याय—1/91; पद्मपुराण—3/60; पद्यावली—1/78; 3/180, 6/239; 8/32; 20/12, 16, 21, 29, 32, 36, 39, 47; पाणिनि—8/78; प्राचीनकृत श्लोक—1/195; बङ्गदेशीय विप्रकृत श्लोक—5/112; विदग्धमाधव—1/99, 120, 128, 132, 136, 138, 139, 142-146, 148, 150, 155, 158-165, 169-171; भक्तिरसामृतसिन्धु—1/108, 212; 3/62, 195; 19/105; भगवत्सन्दर्भ—5/127; भगवद्गीता—4/177-178; 8/65-66; भरतमुनि-वाक्य—16/71; भागवत—2/119; 3/63, 83, 178, 186, 187; 4/59, 63, 64, 69, 175, 194; 5/10, 48, 124, 125, 137; 6/137, 314; 7/10, 27, 29, 32, 33, 39, 41; 8/76; 9/77; 14/86; 15/32-34, 44, 51, 70, 81; 16/26, 27, 117, 140; 17/31; 18/25; 19/45, 70; 20/10; भारवी—10/21; भावार्थदीपिका—5/127; यमुनाचार्य्यकृत श्लोक—3/91; रामचन्द्रपुरीवाक्य—8/47; रूपगोस्वामीकृत श्लोक—1/79, 114; 14/16, 53; लघुभागवतामृत—1/67; 5/123; 7/15; ललितमाधव—1/166-168, 175, 177, 184, 188-191; 19/35; विष्णुपुराण—3/84, 112-115, 344; 24/68, 304; विष्णुस्वामिवाक्य—5/127; सर्वज्ञसूक्तवाक्य—5/127; साहित्यदर्पण—1/186; स्तवमाला—15/97; स्तवावली—6/327; 14/73, 120; 16/87; 17/71; 19/76; हरिभक्तिविलास—3/60; 16/25 । अमृतप्रवाह भाष्यमें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका भक्तिरसामृतसिन्धु—19/101; याज्ञवल्क्य—6/23 । अनुभाष्यमें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका अमरकोष—14/10; अष्टादश-महापुराण—9/10; आदित्य-पुराण—20/57; उज्ज्वलनीलमणि—1/140, उपदेशामृत (रूपगोस्वामीकृत)—4/180; कल्याण-कल्पतरु—4/173; काव्यप्रकाश—18/99; कृष्णकर्णामृत—10/142; गरुड़-पुराण—4/197; 16/28, 29; चैतन्यभागवत—20/87; तत्त्व-सागर—16/28-29; तन्त्र—12/37; तिथितत्त्व—12/108; दिग्दर्शिनी-टीका—4/219, 222; नाटकचन्द्रिका—1/35, 134, 137; नामाष्टक (श्रीरूप गोस्वामी)—4/71; नारायण-संहिता—7/11;