श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 2007, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मपुराण—5/118; 16/28-29; 20/57; पद्यावली—14/53; परिजातसौरभ-भाष्य—2/95; पूर्णप्रज्ञ-दर्शन—2/95; ब्रह्मसूत्र—9/10; भक्तिरत्नाकर—4/218, 226; भक्तिरसामृतसिन्धु—5/97; भक्तिसन्दर्भ—3/60, 220; 4/71; 6/226; 8/24; 20/39; भागवत—4/66, 70-71; 5/45-46, 121; 6/226; 7/45; 9/10; 11/105; 13/113; 16/7, 28-29; 17/54; 19/106-108; 20/71; महाभारत—16/28-29, 96-100; 17/54; मार्कण्डेय-पुराण—20/57; रघुनाथवैद्यलिखित ग्रन्थ—12/120; रामायण—3/80; लघुतोषणी-टीका—8/24, ललितमाधव—14/53, लीलास्तव—4/219-222, विलापकुसुमाञ्जलि—6/1; विष्णुभक्तिचन्द्रोदय—8/24; विष्णुस्मृति—11/3024; शारीरिकभाष्य—2/95; शिक्षाष्टक—4/71; श्रीभाष्य—2/95; श्रुति—5/119; सप्तशती—9/69; सर्वज्ञभाष्य—2/95; साहित्य-दर्पण—1/35, 71, 134, 137, 185; 18/99; सिद्धान्त-शिरोमणि—2/10; स्कन्दपुराण—16/96, 100; स्मृति—8/7; हंसदूत—14/53; हरिभक्तिविलास—3/60; 4/219-222; 6/226।
अमृतानुकणामें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका ऐतरयोपनिषद्—20/21; कठोपनिषद्—20/21; गौरगणोद्देश-दीपिका—7/140; 8/5; चैतन्यभागवत—8/5; छान्दोग्योपनिषद्—20/21; बृहद्भागवतामृत—13/61; बृहदारण्यक—20/21; ब्रह्मसूत्र—20/21; भगवद्गीता—13/61; 20/21; भागवत—13/61; 20/21; भावार्थ-दीपिका—13/61; विदग्धमाधव—18/88; श्वेताश्वतर-उपनिषद्—20/21; श्रीचैतन्य-शिक्षाष्टक—20/21; श्रीमुकुन्दाष्टकम्—13/61; श्रीराधाकृष्णगणोद्देश-दीपिका—13/61; सन्मोदिनी-भाष्य—20/21; सारार्थ-दर्शिनी—13/61 ।
अमृतानुकणिकामें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका कृष्णकर्णामृत-टीका—17/51; गरुड़पुराण—16/17-19; गीतगोविन्द—14/30; चैतन्यभागवत—3/196; 16/17-19; छान्दोग्योपनिषद्—7/113; प्रीतिसन्दर्भ—20/52; भक्तिरसामृतसिन्धु—4/125; भक्तिसन्दर्भ—20/25; भगवद्गीता—16/17-19; भागवत—7/113; 17/51; 20/25, 52; माधुर्य-कादम्बिनी—15/12-23; विलापकुसुमाञ्जली—6/313; श्रीगोविन्दलीलामृत—15/14; श्रीश्रीगोवर्धनाष्टकम्—4/125; श्रीप्रेमविवर्त—7/139; 13/41; सारार्थ-दर्शिनी—19/70 ।
साङ्केतिक चिह्नोंकी सूची
अन्त्य – अन्त्यलीला आदि – आदिलीला उःनीः – उज्ज्वलनीलमणि कठः – कठोपनिषद छाः – छान्दोग्योपनिषद बृःआः – बृहदारण्यकोपनिषद मध्य – मध्यलीला मःभाः – महाभारत