भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 2019, कुल 2549 में से

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पृष्ठ 2019

2 श्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला 1/3-12 ] अनुवाद—मैं (ग्रन्थकार श्रीकृष्णदास कविराज गोस्वामी) श्रीरूप गोस्वामी, श्रीसनातन गोस्वामी, श्रीरघुनाथ-भट्ट गोस्वामी, श्रीजीव गोस्वामी, श्रीगोपालभट्ट गोस्वामी और श्रीरघुनाथ- दास गोस्वामी—इन छह गुरुओंके चरणकमलोंकी वन्दना करता हूँ, जिसके द्वारा समस्त विघ्नोंका नाश और अभीष्ट पूर्ण हो जाता है॥3-4॥ जयतां सुरतौ पङ्गोर्मम मन्दमतेर्गती। मत्सर्वस्वपदाम्भोजौ राधा-मदनमोहनौ॥5॥ अनुवाद—मैं पङ्गु और मन्दमति हूँ; जो मेरी एकमात्र गति हैं और जिनके चरणकमल ही मेरा समस्त धन हैं, वे परम कृपालु श्रीश्रीराधा-मदनमोहन जययुक्त हों॥5॥ अनुभाष्य—आदिलीला 1/15 वाँ श्लोक देखें॥5॥ दीव्यद्वृन्दारण्यकल्पद्रुमाधः श्रीमद्रत्नागारसिंहासनस्थौ। श्रीमद्राधा-श्रीलगोविन्ददेवौ प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि॥6॥ अनुवाद—ज्योतिर्मय-शोभायुक्त वृन्दावनके कल्पवृक्षके नीचे रत्नमन्दिरमें स्थित सिंहासनके ऊपर विराजमान श्रीश्रीराधागोविन्दकी प्रियसखियाँ उनकी सेवा कर रही हैं। मैं उनका स्मरण करता हूँ॥6॥ अनुभाष्य—आदिलीला 1/16 वाँ श्लोक देखें॥6॥ श्रीमान्रासरसारम्भी वंशीवटतटस्थितः। कर्षन् वेणुस्वनैर्गोपीर्गोपीनाथः श्रियेऽस्तु नः॥7॥ अनुवाद—रासरसके प्रवर्तक वंशीवटके तटपर स्थित होकर श्रीमद्गोपीनाथ वेणुध्वनिके द्वारा गोपियोंको आकर्षित कर रहे हैं। वे हमारे मङ्गलका विधान करें॥7॥ अनुभाष्य—आदिलीला 1/17 वाँ श्लोक देखें॥7॥ जय जय श्रीचैतन्य जय नित्यानन्द। जयाद्वैतचन्द्र जय गौरभक्तवृन्द॥8॥ अनुवाद—महाप्रभु श्रीचैतन्यदेव की जय हो। श्रीनित्यानन्द प्रभुकी जय हो। श्रीअद्वैतचन्द्रकी जय हो। श्रीगौर भक्तवृन्दकी जय हो॥8॥ अन्त्यलीलाका वर्णन आरम्भ :— मध्यलीला संक्षेपेते करिलुँ वर्णन। अन्त्यलीला-वर्णन किछु शुन, भक्तगण॥9॥ अनुवाद—मैं महाप्रभुकी मध्यलीलाका संक्षेपमें वर्णन कर चुका हूँ। हे भक्तों! अब महाप्रभुकी अन्त्य-लीलाओंका कुछ वर्णन कर रहा हूँ, आप श्रवण कीजिये॥9॥ इसके पूर्व मध्यलीलाके पहले अध्यायमें अन्त्यलीलाके कुछ सूत्रोंका वर्णन :— मध्यलीला-मध्ये अन्त्यलीला-सूत्रगण। पूर्वग्रन्थे संक्षेपेते करियाछि वर्णन॥10॥ अनुवाद—मैंने मध्यलीलाके पहले अध्यायमें अन्त्यलीलाके कुछ सूत्रोंका संक्षेपमें वर्णन किया है॥10॥ अनुभाष्य—'पूर्वग्रन्थे'—मध्यलीलाके पहले अध्यायमें॥10॥ आमि जराग्रस्त, निकटे जानिया मरण। अन्त्यलीलार कोन सूत्र करियाछि वर्णन॥11॥ अनुवाद—मैं वृद्धावस्थासे ग्रस्त हूँ, अपने देहान्तको निकट जानकर मैंने मध्यलीलामें ही महाप्रभुकी अन्त्यलीलाका सूत्ररूपमें वर्णन किया है॥11॥ उल्लेख नहीं किये गये सूत्रोंका विस्तारसहित वर्णनकी प्रतिज्ञा :— पूर्वलिखित ग्रन्थसूत्र-अनुसारे। येइ नाहि लिखि, ताहा लिखिये विस्तारे॥12॥

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