श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ तुम्हि-देखि पद्य सूची 515 तुम्हि एत कृपा कैला 7/125 | तोमार गुणे स्तुति कराय 4/170 | दधि, चिड़ा भक्षण कराह 6/51 तुम्हि ऐछे ना करिले करे 4/132 | तोमार दर्शन ये पाय, सेइ 7/8 | दम्भ करि' बलि, श्रोता 20/100 तुम्हि कृपा कैले ताँरे 6/131 | तोमार देह आमारे लागे 4/172 | दर्शन दूरे, 'प्रकृतिर' नाम 5/35 तुम्हि कृष्णनाम-मन्त्र कैला 16/71 | तोमार देह कहेन प्रभु 4/94 | दर्शने पवित्र हबे,—इथे 7/9 तुम्हि खाइले हय कोटि 3/220 | तोमार देह तुम्हि कर 4/172 | दर्शनेन्द्रिये शिष्य करि' 14/47 तुम्हि ना देखाइले इहा शिखिमु 13/59 | तोमार नित्य दास मुइ, तोमा 20/33 | दाता, भोक्ता—दुँहार मलिन 6/279 तुम्हि मोरे करियाछ आत्म 4/76 | तोमार बाप-ज्येठा—विषय 6/197 | 'दारी संन्यासी' करि' आमारे 12/114 तुम्हि-सर्वगुरु, तुम्हि-जगतेर 4/103 | तोमार भजन-फले तोमाते 9/69 | दारु-प्रकृति हरे मुनेरपि 2/118 तुलसी सेवन करे, चर्वण 3/140 | तोमार यैछे विषयत्याग, तैछे 1/201 | 'दास' करि' वेतन मोरे देह' 20/37 तुषानले पोड़े,—येन ना 20/41 | तोमार योग्य নহে,—याबे 11/38 | दिने नृत्य-कीर्त्तन, ईश्वर 11/12 तुष्ट हञा शिला-माला 6/293 | तोमार शरीर—मोर प्रधान 4/78 | दिने प्रभु नाना-सङ्गे हय 6/7 तृतीय दिवसे प्रभु ताँर 12/121 | तोमार सङ्गे लोभ हैल 3/254 | दीक्षाकाले भक्त करे आत्म 4/192 तृष्णानुरूप झारी भरि' 20/88 | तोमार सेवक, करौं तोमार 20/34 | दीनदयालु-गुण तोमार ताहाते 4/182 तेँह जानाइला, कृष्ण—स्वयं 7/23 | तोमार सेवा छाड़ि' आमि 19/9 | 'दीन' देखि' कृपा करि' 5/62 तेँह देखाइला मोरे भक्तियोग 7/22 | तोमार हृदय एइ जानिबे 1/115 | दीने दया करे,—एइ साधु 3/235 तेँह याँर पदधूलि करेन 7/45 | तोमारे उपदेश करे, ना 4/159 | दीनेरे अधिक दया करे 4/68 तेँह सेइ शिला-गुञ्जामालो 6/288 | तोमारे काड़िल विषय-विष्ठा 6/193 | दुइ अपूर्व वस्तु पाञा प्रभु 6/290 तेँहो कहे,—"बाउलि, केने 12/23 | तोमारे क्षीण देखि, शुनि 8/63 | दुष्कार्ये अवधूत करेन 3/148 तेँहो कहे,—"संख्या-कीर्त्तन 11/23 | तोमारे ये स्मरण करे, से 7/9 | दुइगुण याँहा, ताँहा नाहि 7/127 तैल भाङ्गि' सेइ पथे निज 12/120 | तोमारे 'लाल्य', आपनाके 4/184 | दुइ-ठाञि अपराधे पाइबि 5/120 तोमरा कृष्णनाम-लह,—कोन् 7/100 | तोमारेह उपदेशे, बालका करे 4/160 | दुइ त' ईश्वरे तोर नाहिक 5/117 तोमाके देखिये,—येन साक्षात् 7/8 | तोमा लागि' रामानन्द राज्य 9/70 | दुइदिके दुइपत्र-मध्ये कोमल 6/297 तोमा-दुँहार कृपाते इँहार 1/57 | तोमा लागि' सनातन 'विषय' 9/70 | दुइ प्रकारे सहिष्णुता करे 20/22 तोमा-स्पर्शे पवित्र हय 4/129 | तोमा सबार दोष नाहि 3/203 | दुइ वस्तु महाप्रभुर आगे 6/289 तोमार अनुकम्पा चाहे, भजे 9/76 | तोमा-सबारेह उपदेश करिते 4/158 | दुर्गति ना हय तार, सद्गति 2/159 तोमार आगमने मोर पवित्र 5/30 | तोमा सम 'निरपेक्ष' नाहि 3/23 | दुर्द्दैव-झञ्झापवने, मेघे 15/68 तोमार आगे धाष्टर्य एइ 1/174 | तोमा-सम भाग्यवान् नाहि 4/94 | दुर्द्दैवे सेवक यदि याय 4/47 तोमार आगे मूर्ख आमि 7/122 | तोरे देखि' मैले मोर हबे 8/22 | दुर्वार इन्द्रिय करे विषय 2/118 तोमार आज्ञाते आमि आछि 3/39 | त्रिजगते तोमार चरित्र बुझे 12/28 | दुर्वासार ठाञि तेँहो पाञाछेन 6/116 तोमार एइ दशा केने 18/46 | | दूरे गान शुनि' प्रभुर 13/80 तोमार कृपा-अञ्जने गर्व 7/125 | द | दूरे रहि' भक्ति करि' सङ्गे 13/37 तोमार कृपा बिना केह 6/131 | | देखा दिया मन हरि' करे 15/80 तोमार कृपाय वंशे मङ्गल 4/29 | दड़िर बन्धने ताँरे राखिबा 6/40 | देखि एइ उपाये, कृष्ण 17/55 तोमार कृष्णनाम-कीर्त्तन 3/250 | दण्ड-दुइ वह प्रभुर हैल 10/91 | देखिते ना पारों आमि 2/117