श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें514 श्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला जालि-तीर्थे ] जालियार चेष्टा देखि' सबार 18/45 जिह्वाय उच्चारिमु तोमार 11/34 जिह्वार लालसे येइ इति-उति 6/227 जीव क्षुद्रबुद्धि कोन् ताहा 20/71 जीव छार कँहा तार पाइबेक 18/21 जीवज्ञान-कल्पित, ईश्वरे 2/99 जीव दीन कि करिबे, ताहार 17/65 जीव-'प्रकृति' 'पति' करि' 7/99 'जीव' हञा केबा सम्यक् पारे 20/80 जीवे सम्मान दिबे जानि 20/25 ट टानाटानि प्रभुर मन हैल 15/9 ठ ठाकुर उपवासी रहे, जिये 2/65 त तथाइ आमार सङ्ग हइबे 12/81 तथापि तोमार ताते प्राकृत 4/173 तथापि नूतनप्राय सब द्रव्ये 10/126 तथापि नामेर तेज ना हय 3/55 तथापि विषयेर स्वभाव-हय 6/199 तथापि भक्त-स्वभाव-मर्यादा 4/130 तथापि से निर्लज्ज, वृथा 16/136 तव कृपा काड़िल आमा 6/194 “तव योग्य नहे” बलि' बले 6/323 तबहिँ विकार पाय मोर 5/36 तबे आमार नाक काटिमु 3/197 तबे गोविन्द तार बहिर्वास 10/89 तबे जानिबा सिद्धान्तसमुद्र 5/132 तबे पाण्डित्य तोमार हइबे 5/133 तमो-रजो-धर्मे कृष्णेर ना 4/57 तरजा-प्रहेली आचार्य कहेन 19/18 तरजार ना जानि अर्थ 19/27 तरजा शुनि' महाप्रभु ईषत् 19/23 तरुणी-स्पर्शे रामानन्देर तैछे 5/19 तर्क ना करिह, तर्कगोचर 3/226 तर्क ना करिह, शुन, विश्वास 19/106 तर्केर गोचर नहे नामेर 3/204 तर्केर गोचर नहे चरित्र 19/103 ताँर आज्ञा बिना आमि ना 7/147 ताँर आज्ञा भाङ्गे ताँर 10/6 ताँर आज्ञाय आइला, आज्ञा 4/235 ताँर चरण धुञा करौँ 20/151 ताँर पिता कहे तारे 6/38 ताँर प्रसादे जानिलुँ 'कृष्ण 7/22 ताँर फल कि कहिमु 5/50 “ताँर येइ आज्ञा”—बलि' 19/23 ताँर लागि' आमि मरि 19/51 ताँर शेष पाइले, तोमार 6/123 ताँर सङ्गे आमार मन 7/17 ताँरे कैलि क्षुद्र जीव 5/119 ताँरे कैलि जड़-नश्वर 5/118 ताँरे तुमि उठाइला आपनार 18/65 ताँरे बालु दिया उपरे पिण्डा 11/69 ताँरे भय नाहि किछु, 'विषम' 7/94 ताँ-सबार आगे भट्ट-खद्योत 7/60 ताँ-सबार आचार-चेष्टा 13/37 ताहाते तर्क उठाञा दोष 8/49 ताँहा बिकाइ, याँहा बेचिते 12/74 ताहा बिना रत्न-शून्या 11/97 ताँहा याब, सेइ मोर 4/144 ताँहार मनेर भाव तैं ह 5/43 ता'ते अनुरागी वाञ्छे आपन 4/62 ताते जानि अप्राकृत-देह 5/42 ताते जानि,-कोन तपस्यार 16/138 ताते जानि-पूर्वे तोमार 1/117 ताते प्रेमभक्ति-'पुरुषार्थ 7/24 ताते बार बार कहि,-शुन 16/62 ताते 'वैष्णवेर झूटा' खाओ 16/58 तावत् इँहा बसि' शुन नाम 3/120 तार एक कणा स्पर्शि आपना 20/71 तार एक 'लव' ये पाय 16/98 तार दुःख देखि' तार 9/74 तार मध्ये पूर्वविधि 'प्रशंसा' 8/77 ता'र मध्ये मिथ्या केने 1/179 ता'र मध्ये सर्वश्रेष्ठ नाम 4/71 तार लक्षण-श्लोक शुन 20/20 तारे मिलिबारे प्रभु आवेशे 13/81 ताहा छाड़िते चाह तुमि 4/83 ताहा जानिबारे आर द्वितीय 5/43 ताहाते दीक्षित आमि हइ 3/238 ताहाते सुगन्धि तैल,-परम 12/108 ताहा बिना नहे तोमार 1/117 ताहा येइ पाय, तार सफल 16/135 ताहार गणना कारों, मने 9/109 ताहा हरि' भोग करे महापापी 9/89 तिन अमृते हरे काण, हरे 17/38 तिनगुण-क्षोभ नहे, 'महाधीर' 5/46 तिन चापड़ मारि' कह 18/62 तिन-दशाय महाप्रभु रहेन 18/77 तिनद्वार देओया आछे, प्रभु 14/60 तिन दिन रहि' सेइ विप्रेर 3/207 तिन पुत्र मरुक शिवार 12/20 तिन भोग खाइला, किछु 2/62 तिन 'रघुनाथ'-नाम हय 6/203 तिन-लक्ष नाम ठाकुर करेन 3/175 तिन हैते कृष्णनाम-प्रेमेर 16/63 तीरे रहि' देखि आमि 18/82 तीर्थेर महिमा, निज-भक्ते 2/169