भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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[ खण्डि-जालि पद्य सूची 513 ख गौर-पादपद्म याँर हय प्राण 5/106 चैतन्येर लीला-गम्भीर 3/47 गौरलीला, भक्ति-भक्त-रस 5/163 चोरार माके डाकि' कान्दिते 16/129 खण्डिबे आध्यात्मिकादि 19/110 ग्राम्यकथा ना शुनिबे, ग्राम्यवार्त्ता 6/236 चौद्द-हात जगन्नाथेर तुलसीर 13/123 खाइते शुइते यथा तथा 20/18 ग्राम्य-कविर कवित्व शुनिते 5/107 चौर-प्रेत-राक्षसादि भय हय 3/183 खाओयाञा पुनः तारे करये 8/72 ग्राम्यवार्त्ता ना शुने, ना कहे 13/132 खासा वस्तु खाओ सबे 6/322 छ घ ग छत्रे गिया यथा-लाभ उदर 6/286 घट-पटिया मूर्ख तुमि 3/199 छत्रे मागि' खाय मध्याह्नकाले 6/283 'गदाधर-प्राणनाथ' नाम हैल 7/159 घृणा नाहि जन्मे, आर 4/186 छोड़ि' कृष्णकथा अधन्य, कह 17/55 गम्भीरा-भितरे मुख घषिते 19/58 छिण्डा-कानि काँथा बिना 6/312 गाढानुरागेर वियोग ना याय 4/62 च छिद्र चाहि' बुले, काँहा छिद्र 8/41 'गीतगोविन्द'-पद गाय 3/79 छोट हरिदासे इँहा आसिते 2/113 गुञ्जामाळा दिया दिला राधिका 6/307 चञ्चलस्वभाव कृष्णेर, ना रय 15/80 गुणमध्ये छले करे दोष 8/79 चन्दन-पङ्केते आमार ज्ञान 4/179 ज गुर्जरीरागिनी लञा सुमधुर 13/79 चम्पक-कलि-सम हस्त 3/208 गुरु उपेक्षा कैले, ऐछे 8/97 चान्द धरिते चाहे, येन हञा 18/19 जगत् नाचाओ, यारे यैछे 11/29 'गुरु' हञा तरुलताय शिखाय 19/81 'चित्, ब्रह्म, माया, मिथ्या' 2/98 जगत्-निस्तार लागि' करेन 3/221 गुह्य अङ्ग यत, तार 5/39 चित्त शुद्ध हैल, चाहे 3/251 जगत् भासाइते पारे यार 5/88 'गृहस्थ' हञा नहे राय षड्वर्गेर 5/80 चित्तशुद्धि, सर्वभक्तिसाधन 20/13 जगते नाहि जगदानन्द-सम 4/162 गोपीनाथ-पट्टनायक-रामानन्द 9/17 चेतन पाइते अस्थि-सन्धि 14/71 जगतेर मध्ये 'पात्र'-साड़े 2/105 गोपीभाव हृदये, तार वाक्य 19/53 चैतन्यचन्द्रेर कृपा हञाछे 6/41 जगतेर हित लागि' गौर 7/113 गोवर्द्धन-शिला प्रभु हृदये 6/291 चैतन्यचरित्र एइ परम 9/151 जगतेर 'हित' हउक,-एइ 7/136 गोवर्धन हैते मोरे के इँहा 14/105 चैतन्यचरितामृत नित्य कर 5/89 जगद्गुरु श्रीधरस्वामी, 'गुरु' 7/129 गोवर्धने ना चड़िह देखिते 13/39 श्रीचैतन्यचरितामृत-नित्य 19/111 जगदानन्दे पिआओ आत्मीयता 4/163 'गोवर्द्धनेर शिला', 'गुञ्जा-माला' 6/287 चैतन्यचरितामृत येइ जन 20/151 जगदानन्देर प्रेमविवर्त्त शुने 12/154 गोविन्द कहे,-'आमार 'सेवा' 10/95 चैतन्यचरित्र एइ-अमृतेर 11/106 जगन्नाथ-नृसिंह-सह किछु 2/67 गोविन्द कहे, -'उठ आसि' 11/18 चैतन्यप्रभुर लीला के बुझिते 7/161 जन्मे जन्मे तुमि पञ्च-मोर 9/141 गोविन्द कहे,-'जगन्नाथ राखेन 13/86 चैतन्यलीलामृत-सिन्धु-दुग्धाब्धि 20/88 जन्मदाता पिता नारे 'प्रारब्ध' 6/40 गोविन्द कहे,-"श्रीकान्त, आगे 12/37 चैतन्यावतारे कृष्णप्रेमे लुब्ध 3/260 जन्मे जन्मे तोमार पाय 5/76 गोविन्द-चरणारविन्द-याँर 13/130 चैतन्यावतारे बहे प्रेमामृत 3/252 जल-तुलसीर सेवाय यत 6/302 गोविन्द-चरणे कैला आत्म 13/130 चैतन्येर कृपाय जाने एइ 10/100 जानि' हरिदास ताँरे कैला 4/14 गोविन्दे देखिया प्रभु बले 10/92 चैतन्येर प्रेमपात्र जगदानन्द 12/101 जाल बाहिते एक मृत मोर 18/47 गोविन्देरे महाप्रभु कैराछे 16/43 चैतन्येर भक्तगणे नित्य कर 5/132 जालिया कहे,-"इँहा एक 18/47