श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें512 श्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला कालि-क्षुधा ] कालिन्दी देखिया आमि गेलाङ 18/80 कृष्ण करेन, महाप्रभु मग्न 18/32 कृष्णेर उपरे येन कैल 7/120 काष्ठ-पाषाण-स्पर्शे हय 5/19 कृष्ण कृपामय ताहा अवश्य 11/37 कृष्णेर प्रसाद, ताते 'साक्षी' 16/63 काष्ठेर पुतली येन कुहके 4/85, कृष्ण ताहा सम्यक् ना पारे 18/17 कृष्णेर वियोगे गोपीर दश 14/52 12/85 कृष्णनाम उपदेशि' कृपा करह 3/251 कृष्णेर याँते पूर्ण कृपा 16/99 काष्ठेर पुतली तुमि पार 1/203 कृष्णनाम देह' तुमि मोरे 3/256 कृष्णेर ये भुक्त-शेष, तार 16/98 काँहा करों, काँहा याङ 15/24 'कृष्णनाम' पारक हञा करे 3/255 कृष्णेर स्वरूप-लीला वर्णिबा 5/133 काँहा 'क्षुद्र' जीव 'दुःखी' 5/126 कृष्णनाम बिना तेंहो नाहि 16/5 कृष्णेरे नाचाय प्रेमा, भक्तेरे 18/18 काँहा गेले तोमा पाइ 17/61 कृष्णनाम लञा नाचे, प्रेम 3/261 कृष्णेरे बाहिर नाहि करिह 1/66 काँहा तोमार कृष्णरसवाक्य 1/179 कृष्णनाम 'सङ्केते' चालाय 16/6 के कहिते पारे गम्भीर 5/87 काँहा 'पूर्णानन्दैश्वर्य' कृष्ण 5/126 कृष्णनामेर महिमा शास्त्र 1/101 के कहिते पारे गौरेर आश्चर्य 9/115 काँहा यमुना, वृन्दावन 18/109 कृष्णपादपद्म-गन्ध येइ जन 6/136 के बुझिते पारे गौरेर कृपा 9/58 काँहा याङ, काँहा पाङ 12/5 कृष्णप्राप्ति, सेवामृत-समुद्रे 20/14 के मोर निलेक कृष्ण 14/37 कि करिले हित हय नारि 4/140 कृष्णप्राप्त्ये उपाय कोन नाहि 4/56 केह बले,—'नाम हैते हय 3/176 किन्तु आमार ये किछु 11/38 कृष्णप्रेम-कण तैछे जीवेर 18/20 केह बले,—'नाम हैते जीवेर 3/176 किन्तु तोमार स्मरणेर नहे 9/137 'कृष्णप्रेम', 'कृष्ण' दिते धरे 4/70 कैछे नाचे, केबा नाचाय 4/86 किन्तु शास्त्रदृष्ट्ये करि एक 5/44 कृष्णप्रेमे मत्त करे कृष्ण 3/266 कैला जगते वेणुध्वनि 17/35 किवा अनुराग करे, किवा 20/49 कृष्णप्रेमोद्गम, प्रेमामृत 20/14 कोटिचिन्तामणि-लाभ नहे 9/95 किवा ना देय दरशन 20/48 कृष्णविच्छेदे प्रभुर से-दशा 14/12 कोटि-जन्मे ब्रह्मज्ञाने येइ 3/192 कि मोर कर्त्तव्य, मुञि 6/232 कृष्णभक्ति बिना प्रभुर ना 2/91 कोटि-देह क्षणके तबे 4/55 कीर्त्तन समाप्त हैले, हय 3/239 कृष्णभजने नाहि जाति-कुल 4/67 कोटि नामग्रहणयज्ञ करि 3/123 कुक्कुरके 'कृष्ण' कहाञा 1/33 कृष्ण मथुराय गेले गोपीर 14/12 कोटिमन्मथमोहन मुरलीवदन 15/56 कुबुद्धि छाड़िया कर श्रवण 4/65 कृष्ण-मोर जीवन 20/58 कोटियुग पर्यन्त यदि लिखये 18/14 कुमाररेर चाक येन सतत 15/6 कृष्ण मोरे 'कान्ता' करि' 20/59 कोथा हैते जानिबे से एइ 3/204 कुलीन, पण्डित, धनीर बड़ 4/68 कृष्ण यार ना पाय अन्त 18/15 कोन् छार पदार्थ एइ दुइ 9/96 कुष्ठी-विप्रेर रमणी 20/57 कृष्णरस आस्वादये दुइ 20/69 कोन् जाने क्षुद्र जीव काँहा 5/26 कृपा करि' कर मोरे 20/34 कृष्णरूपामृतसिन्धु, ताहार 15/19 कोनप्रकारे हरिदासेर छिद्र 3/103 कृपा करि' कृष्ण मोरे 11/94 कृष्णलीला वर्णिते ना जाने 5/105 कोन प्रवासीरे दिमु, कि 13/61 कृपा करि' मोर माथे 7/126 कृष्णलीला-मण्डल, शुद्ध 14/44 कौतुकेते तेंहो यदि पाशक 16/7 कृपाते करिल अनेक-नामेर 20/17 कृष्णलीलारस-प्रेम याहा हैते 4/220 क्या करों, काँहा याङ 17/53 कृष्ण-आदि, आर यत 3/266 कृष्ण-शक्ति बिना नहे तार 7/11 क्रमे ईश्वर-पर्यन्त अपराधे 8/97 कृष्णनाम उपदेशि' कृपा 3/251 'कृष्णसुखतात्पर्य',—एइ तार 7/39 क्रमे क्रमे हैल प्रभुर से 14/13 'कृष्ण'—एक प्रेमदाता, शास्त्र 7/14 कृष्ण-स्वभाव,—भक्त-निन्दा 3/211 क्षणे क्षणे उठे प्रेमार तरङ्ग 18/21 कृष्णकथा-पूजादिते अष्टप्रहर 13/132 कृष्णाद्भुत बलाहक, मोर 15/65 क्षुद्रजीव सब मर्कट-वैराग्य 2/120 कृष्णकथाय रुचि तोमार 5/9 कृष्णे नामाविष्ट-मना सदा 3/244 क्षुधा नाहि बाधे, चैतन्यचरण 6/186