भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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पृष्ठ 2528

[ [एइ-कालि] पद्य सूची 511

पदसंदर्भ
एइ इहार मनःकथा करि16/72
ए-ऋण शोधिते आमि नारिमु13/86
एइ कहे, —नामाभास-मात्रे3/192
एइ चारि ठाञि, प्रभुर सदा2/35
एइ त' स्वभाव ताँर आग्रह8/15
एइ तिन-सेवा हैते कृष्णप्रेमा16/61
एइ दुइद्वारे शिखाइला जगजने8/30
एइ दुइर कड़काते ए-लीला14/7
एइ निमन्त्रणे देखि, —'प्रतिष्ठा'6/275
एइ नीच देह मोर पड़ुक11/36
एइ प्रेम सदा जागे याहार19/104
एइ वाञ्छा-सिद्धि मोर11/36
एइ व्रजेर रमणी, कामार्क19/38
'एइ भाल, एइ मन्द'4/176
एइ भोगे हय कैछे8/42
एइमत अष्टमञ्जरी दिबे श्रद्धा6/297
एइमत गौर-राय, विषादे19/53
एइमत तिनवत्सर शिला-माला6/293
एइमत महाप्रभुर सुखे काल11/13
एइमत मोर इच्छा, —छाड़िमु11/34
एइमत हञा येइ कृष्णनाम20/26
एइ रघुनाथे आमि सँपिनु6/202
एइ शिलार कर तुमि6/295
एइ 'शुष्क-वैराग्य' नहे8/63
एइ सब हय भक्तिशास्त्र10/100
एइ सुख लागि' आमि12/113
एक एक पाते पञ्चजनार11/82
एक एक हस्त-पाद14/65
एक कुँजा जल आर6/296
एकक्षण प्रभुर यदि पाइये9/95
एक जनार दोषे सब3/163
एकदिन गोविन्द महाप्रसाद11/16
एकदिन प्रभु यमेश्वर-टोटा13/78
एकदिनेर लीलार तबु18/13-14
एकपाश हओ, मोरे देह'10/86
एकवाक्यता नाहि, ताते7/110
एक वाञ्छा हय मोर11/31
एकबारे स्फुरे प्रभुर कृष्णेर15/8
एकमन पञ्चदिके पञ्चगुण15/9
एक वस्त्र लञा तार करिला11/20
एक रामानन्देर हय एइ5/42
एकलीला-प्रवाहे बहे शत5/162
एक लीलाय करेन प्रभु2/169
एकलीलाय बहे गङ्गार शत7/161
एकश्लोक पड़िते फिराय13/128
एकसखी सखीगणे देखाय18/82
एकान्त आश्रय कर चैतन्य5/131
'एत अन्न खाओ'—तोमार8/72
एत बलि' एक ग्रास करिला6/322
एत बलि' घर हैते तैल12/119
एत बलि' ताँरे पुनः6/287
एत बलि' महाप्रसाद करिला11/20
एत बलि' श्राद्धपात्र कराइला3/220
एत सब कर्म आमि4/83
ए-वन्याय ये ना भासे3/253
एबार तोमार येइ हइबे12/47
ए शरीरे साधिमु आमि4/78
ए सङ्कटे कृष्ण राख7/93
ए-सब कथाते कारो ना3/258
ए सब बान्धिते नारिलेक6/39
ए सौभाग्य लागि' आगे11/105

पदसंदर्भ
ऐछे कवित्व बिना नहे1/198
ऐछे चैतन्यनिष्ठा योग्य13/59
ऐछे दयालु दाता लोके17/68
ऐछे नामोदयारम्भे पाप3/184
ऐछे स्वाद आर कोन प्रसादे6/324
'ऐश्वर्यज्ञानयुक्त', 'केवल'-भाव7/26
ऐश्वर्यज्ञान हैते केवल-भाव7/44
ऐश्वर्य-ज्ञाने ना पाइ7/26
ऐश्वर्य देखिलेह 'शुद्धेर' नहे7/35

पदसंदर्भ
कतक्षणे प्रभुर काणे शब्द18/75
कत ठाञि बुझाञाछ व्यवहार4/168
कवित्व ना हय एइ अमृतेर1/193
कभु गुप्त, कभु व्यक्त6/124
कभु गों गों करे, कभु18/54
कभु नासाय घ्राण लय6/291
कभु बाह्यस्फूर्त्ति, —तिन15/5
कभु भावे मग्न, कभु15/5
कभु लौकिक रीति, —येन8/91
कभु स्वतन्त्र, करेन ऐश्वर्य8/91
कर्ण-मन तृप्त करे11/106
कर्णामृत, विद्यापति, श्रीगीत15/27
कर्त्तुमकर्त्तुमन्यथा करिते9/44
कलिकालरे धर्म—कृष्णनाम7/11
कह जालिय़ा, एइ दिके18/46
कहिते ना युयाय, तबु20/99
कहिबार कथा नहे, याहा5/37
काड़िते ना पारों माथा4/40
कान्त-सेवा-सुखपूर, सङ्गम20/60
कार्यसिद्धि नहे, कृष्ण करेन6/224
काल, देश, नियम नाहि20/18
कालिकार पड़ुया जगा ऐछे4/158
कालिदासे पाओयाइल प्रभुर16/57