श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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[ [एइ-कालि] पद्य सूची 511
ए
| पद | संदर्भ |
|---|---|
| एइ इहार मनःकथा करि | 16/72 |
| ए-ऋण शोधिते आमि नारिमु | 13/86 |
| एइ कहे, —नामाभास-मात्रे | 3/192 |
| एइ चारि ठाञि, प्रभुर सदा | 2/35 |
| एइ त' स्वभाव ताँर आग्रह | 8/15 |
| एइ तिन-सेवा हैते कृष्णप्रेमा | 16/61 |
| एइ दुइद्वारे शिखाइला जगजने | 8/30 |
| एइ दुइर कड़काते ए-लीला | 14/7 |
| एइ निमन्त्रणे देखि, —'प्रतिष्ठा' | 6/275 |
| एइ नीच देह मोर पड़ुक | 11/36 |
| एइ प्रेम सदा जागे याहार | 19/104 |
| एइ वाञ्छा-सिद्धि मोर | 11/36 |
| एइ व्रजेर रमणी, कामार्क | 19/38 |
| 'एइ भाल, एइ मन्द' | 4/176 |
| एइ भोगे हय कैछे | 8/42 |
| एइमत अष्टमञ्जरी दिबे श्रद्धा | 6/297 |
| एइमत गौर-राय, विषादे | 19/53 |
| एइमत तिनवत्सर शिला-माला | 6/293 |
| एइमत महाप्रभुर सुखे काल | 11/13 |
| एइमत मोर इच्छा, —छाड़िमु | 11/34 |
| एइमत हञा येइ कृष्णनाम | 20/26 |
| एइ रघुनाथे आमि सँपिनु | 6/202 |
| एइ शिलार कर तुमि | 6/295 |
| एइ 'शुष्क-वैराग्य' नहे | 8/63 |
| एइ सब हय भक्तिशास्त्र | 10/100 |
| एइ सुख लागि' आमि | 12/113 |
| एक एक पाते पञ्चजनार | 11/82 |
| एक एक हस्त-पाद | 14/65 |
| एक कुँजा जल आर | 6/296 |
| एकक्षण प्रभुर यदि पाइये | 9/95 |
| एक जनार दोषे सब | 3/163 |
| एकदिन गोविन्द महाप्रसाद | 11/16 |
| एकदिन प्रभु यमेश्वर-टोटा | 13/78 |
| एकदिनेर लीलार तबु | 18/13-14 |
| एकपाश हओ, मोरे देह' | 10/86 |
| एकवाक्यता नाहि, ताते | 7/110 |
| एक वाञ्छा हय मोर | 11/31 |
| एकबारे स्फुरे प्रभुर कृष्णेर | 15/8 |
| एकमन पञ्चदिके पञ्चगुण | 15/9 |
| एक वस्त्र लञा तार करिला | 11/20 |
| एक रामानन्देर हय एइ | 5/42 |
| एकलीला-प्रवाहे बहे शत | 5/162 |
| एक लीलाय करेन प्रभु | 2/169 |
| एकलीलाय बहे गङ्गार शत | 7/161 |
| एकश्लोक पड़िते फिराय | 13/128 |
| एकसखी सखीगणे देखाय | 18/82 |
| एकान्त आश्रय कर चैतन्य | 5/131 |
| 'एत अन्न खाओ'—तोमार | 8/72 |
| एत बलि' एक ग्रास करिला | 6/322 |
| एत बलि' घर हैते तैल | 12/119 |
| एत बलि' ताँरे पुनः | 6/287 |
| एत बलि' महाप्रसाद करिला | 11/20 |
| एत बलि' श्राद्धपात्र कराइला | 3/220 |
| एत सब कर्म आमि | 4/83 |
| ए-वन्याय ये ना भासे | 3/253 |
| एबार तोमार येइ हइबे | 12/47 |
| ए शरीरे साधिमु आमि | 4/78 |
| ए सङ्कटे कृष्ण राख | 7/93 |
| ए-सब कथाते कारो ना | 3/258 |
| ए सब बान्धिते नारिलेक | 6/39 |
| ए सौभाग्य लागि' आगे | 11/105 |
ऐ
| पद | संदर्भ |
|---|---|
| ऐछे कवित्व बिना नहे | 1/198 |
| ऐछे चैतन्यनिष्ठा योग्य | 13/59 |
| ऐछे दयालु दाता लोके | 17/68 |
| ऐछे नामोदयारम्भे पाप | 3/184 |
| ऐछे स्वाद आर कोन प्रसादे | 6/324 |
| 'ऐश्वर्यज्ञानयुक्त', 'केवल'-भाव | 7/26 |
| ऐश्वर्यज्ञान हैते केवल-भाव | 7/44 |
| ऐश्वर्य-ज्ञाने ना पाइ | 7/26 |
| ऐश्वर्य देखिलेह 'शुद्धेर' नहे | 7/35 |
क
| पद | संदर्भ |
|---|---|
| कतक्षणे प्रभुर काणे शब्द | 18/75 |
| कत ठाञि बुझाञाछ व्यवहार | 4/168 |
| कवित्व ना हय एइ अमृतेर | 1/193 |
| कभु गुप्त, कभु व्यक्त | 6/124 |
| कभु गों गों करे, कभु | 18/54 |
| कभु नासाय घ्राण लय | 6/291 |
| कभु बाह्यस्फूर्त्ति, —तिन | 15/5 |
| कभु भावे मग्न, कभु | 15/5 |
| कभु लौकिक रीति, —येन | 8/91 |
| कभु स्वतन्त्र, करेन ऐश्वर्य | 8/91 |
| कर्ण-मन तृप्त करे | 11/106 |
| कर्णामृत, विद्यापति, श्रीगीत | 15/27 |
| कर्त्तुमकर्त्तुमन्यथा करिते | 9/44 |
| कलिकालरे धर्म—कृष्णनाम | 7/11 |
| कह जालिय़ा, एइ दिके | 18/46 |
| कहिते ना युयाय, तबु | 20/99 |
| कहिबार कथा नहे, याहा | 5/37 |
| काड़िते ना पारों माथा | 4/40 |
| कान्त-सेवा-सुखपूर, सङ्गम | 20/60 |
| कार्यसिद्धि नहे, कृष्ण करेन | 6/224 |
| काल, देश, नियम नाहि | 20/18 |
| कालिकार पड़ुया जगा ऐछे | 4/158 |
| कालिदासे पाओयाइल प्रभुर | 16/57 |