श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें510 श्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला आज्ञा-उपास ]
आज्ञा लद्धि' आइला, कि 12/69 'आदिवस्या' एइ स्त्रीरे ना 14/26 आनुषङ्गिक फल नामेर 3/179 आपन कारुण्य, लोके वैराग्य 2/168 आपना बिना अन्य माधुर्य 16/111 आपनार आगे मोर शरीर 11/32 आपनार कथा परमुण्डे देन 5/77 आपनार गुण नाहि आपने 5/78 आपनारे करे संसारी जीव 20/31 आपनि प्रद्युम्नमिश्र-सह हय 5/85 आपनि श्रीमुखे मोरे करुन 6/232 आपनि श्रीहस्ते बालु दिला 11/68 आपने आचरे केह, ना करे 4/102 आपने नाचये-तिने नाचे 18/18 आपने ना जाने, पुतली 4/85 आपने प्रश्न करि' पाछे 5/64 'आवेश' करये काँहा हजा 2/4 आभासे कहेन प्रभु, शुनेन 18/79 आमाकेह बुझाइते तुमि 4/168 आमार उपदेष्टा तुमि 4/160 आमार एइ देह प्रभुर कार्ये 4/98 आमार दुर्देव, - नामे नाहि 20/19 आमार शक्ति ताँरे नारिल 11/95 आमार शरीर - काष्ठपुतली 20/92 आमार 'सर्वनाश'-तोमार 12/113 आमार 'हित' करेन, -इहो 7/120 आमारे आदर कर, ना 3/217 आमारे खाट-तुलि-बालिश 13/15 आमारे भासाओ तैछे एइ 3/256 आमा-सब अधमे ये 4/182 आमा-सबाय नाहि देह' 6/320 आमा-हेन यदि एक कीट 11/41 आमि अज्ञ जीव, - अज्ञोचित 7/122 आमि-अज्ञ, 'हित'-स्थाने 7/124 आमि-अति क्षुद्र जीव 20/90 आमि-कृष्णपद-दासी 20/48 'आमि जिति', - एइ गर्व 7/118 आमि त'-संन्यासी, आमार 4/179 आमि त' संन्यासी, आपनारे 5/35 आमि त' संन्यासी, -तैल 12/116 आमि-नीचजाति, आमार 16/29 आमि-परतन्त्र, आमार प्रभु 7/147 'आमि लिखि', -इह मिथ्या 20/92 आमि सब, - केवलमात्र 12/134 आमि सब ना जानि 2/136 आमिह देखिते ताहा याइमु 1/219 आर ग्रास लैते स्वरूप 6/323 आर दिन महाप्रभु ताँर 11/21 आर सब कड़चा-कर्त्ता 14/8 आरे मूर्ख, आपनार कैलि 5/117 आश्चर्य, - तरुणी-स्पर्शे निर्विकार 5/41 आस्वाद दूरे रहु, गन्धे माते 16/111 आस्वादिते प्रेमे मत्त हइल 16/115 आस्ते-व्यस्ते गोविन्द ताँर 13/82
इ
इच्छामात्रे कैला निजप्राण 11/96 इतर-लोकेर ताते ना 14/82 इन्द्र येन कृष्णेर निन्दा 7/124 इन्द्रसम ऐश्वर्य, स्त्री अप्सरा 6/39 इन्द्रिय चराजा बुले 'प्रकृति' 2/120 इन्द्रिय-दमन हैल, प्रेमेर 3/140 इहलोक, परलोक-दुइ हय 4/131 इहाते संशय यार, सेइ 6/125 इहा वड़ महाभाग्य आमि 5/58 इहा येइ नाहि शुने, से 17/48 ईँहार ये ज्येष्ठभ्राता, नाम 1/200 ईँहार सङ्गोचे आमि एतदिन 6/280 ईँहारे पुछह, ईँह करिबेन 7/101 ईँहा हैते आजि मुइ 14/106 इहार श्लोक-गीते प्रभुर 15/27
ई
ईश्वर-चरित्र किछु बुझन 12/85 ईश्वर-चरित्र प्रभुर-बुद्धि 8/93 ईश्वर जगन्नाथ, याँर हाते 9/44 ईश्वरपुरी करे श्रीपाद-सेवन 8/26 ईश्वर-स्वभाव'-भक्तेर ना 1/107 ईश्वर-स्वभाव, - ऐश्वर्य चाहे 3/90 ईश्वर-स्वभाव,- करेन 7/118 ईश्वरेर नाहि कभु देह 5/122
उ
उच्च करि' कहे कृष्णनाम 14/59 उच्च सङ्कीर्त्तन ता'ते करिला 3/75 उठह पण्डित करि' कहेन 12/121 उठि' ताँरे लाथि माइला 12/24 उठि' शिवानन्दे कैला प्रेम 12/31 उठितेइ अस्थि सब लागिल 18/76 उत्तम हञा आपनाके माने 20/22 उदय कैले कृष्णपदे हय 3/184 उदय ना हैते आरम्भे 3/182 उदय हैले धर्म-कर्म 3/183 उद्धव-दर्शने यैछे राधार 14/13 उपदेश पाञा माया चलिला 3/258 उपमा दिवार नाहि ए-तिन 6/104 उपरोधे प्रभु मोर मानेन 6/276 उपासना लागि' देवेर करेन 19/26