श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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४/२७७ ] इति अनुभाष्ये चतुर्थ परिच्छेद। चौथे अध्यायका अनुभाष्य पूर्ण हुआ। श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ २७७ ॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते आदिखण्डे चैतन्यावतार-मूलप्रयोजनकथनं नाम चतुर्थ-परिच्छेदः। अनुवाद—श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका वर्णन कर रहा है॥ २७७ ॥ श्रीचैतन्यचरितामृत आदिखण्डमें चैतन्यावतारके मूलप्रयोजनका वर्णन नामक चौथे अध्यायका अनुवाद समाप्त। चौथा अध्याय | २४७